बस्तर में टसर रेशम को मिलेगा नया विस्तार: 2 अक्टूबर का बड़ा प्रशिक्षण समारोह, ग्रामीणों के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
जगदलपुर, 1 अक्टूबर 2026। बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थानीय संसाधनों को रोजगार से जोड़ने की कोशिशों के बीच टसर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कार्यक्रम होने जा रहा है। ग्रामोद्योग विभाग के रेशम प्रभाग की ओर से 2 अक्टूबर को जगदलपुर में टसर रेशम कीट पालन और रेशम धागाकरण प्रशिक्षण सह अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का आयोजन कालीपुर रोड, धरमपुरा स्थित रेशम धागाकरण इकाई में सुबह 11 बजे से होगा। इसका उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि रेशम उत्पादन से जुड़े हितग्राहियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और उन्हें बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है।
बस्तर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है टसर रेशम?
बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था लंबे समय से जंगल आधारित संसाधनों, कृषि और पारंपरिक कौशल पर निर्भर रही है। ऐसे में टसर रेशम जैसी गतिविधियां स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने की क्षमता रखती हैं।
रेशम उत्पादन की खासियत यह है कि इसमें एक ही गतिविधि से कई स्तरों पर आर्थिक अवसर बनते हैं। कीट पालन से लेकर कोसा उत्पादन, धागाकरण, बुनाई और तैयार उत्पादों की बिक्री तक पूरी श्रृंखला स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ सकती है।
यही वजह है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को केवल एक सरकारी आयोजन मानने के बजाय इसे ग्रामीण कौशल को बाजार से जोड़ने वाली कड़ी के रूप में देखना अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षण से बदल सकता है उत्पादन का तरीका
रेशम उत्पादन में गुणवत्ता केवल कच्चे माल पर निर्भर नहीं करती। कीट पालन की तकनीक, कोसा की गुणवत्ता, धागा निकालने की प्रक्रिया और उसका रखरखाव अंतिम उत्पाद के मूल्य को प्रभावित करते हैं।
प्रशिक्षण के जरिए हितग्राहियों को वैज्ञानिक और बेहतर तकनीकों की जानकारी मिलने से उत्पादन में स्थिरता लाई जा सकती है। लंबे समय में इसका असर केवल उत्पादन बढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाले रेशम से उत्पादकों को बाजार में बेहतर अवसर भी मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ग्रामीण उद्योग को सफल बनाने के लिए उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच मजबूत होना जरूरी है। इसलिए टसर रेशम के क्षेत्र में प्रशिक्षण के अगले चरण के रूप में उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजाइन और बाजार संपर्क पर भी जोर देना महत्वपूर्ण होगा।
समारोह में ये जनप्रतिनिधि होंगे मौजूद
2 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम में जिला पंचायत बस्तर की अध्यक्ष वेदवती कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी अतिविशिष्ट अतिथि होंगे।
इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान, ललिता कश्यप और सम्पति महादेव नाग विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगी।
समारोह में रेशम उत्पादन और धागाकरण से जुड़े हितग्राहियों को प्रशिक्षण के साथ प्रोत्साहन और अलंकरण से भी जोड़ा गया है। इससे स्थानीय स्तर पर इस काम से जुड़े लोगों के बीच प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।
असली चुनौती उत्पादन से आगे की है
टसर रेशम को बस्तर की अर्थव्यवस्था में बड़ा स्थान दिलाने के लिए केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्याप्त नहीं होंगे। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को कितनी नियमित तकनीकी सहायता मिलती है और उनका उत्पाद कितनी आसानी से बाजार तक पहुंचता है।
अगर कच्चे रेशम और धागे को स्थानीय स्तर पर ही आगे प्रसंस्कृत कर कपड़ा, साड़ी, स्टोल और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों में बदला जाए तो मूल्यवर्धन काफी बढ़ सकता है।
इस मॉडल में सबसे बड़ा अवसर स्थानीय उत्पादन से स्थानीय ब्रांड तक जाने का है। बस्तर की पहचान, पारंपरिक कला और टसर रेशम को एक साथ जोड़कर बाजार में अलग पहचान बनाई जा सकती है।
महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए बढ़ सकता है अवसर
रेशम उत्पादन और उससे जुड़े कई काम ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार आधारित गतिविधियों के रूप में किए जा सकते हैं। इसलिए यदि प्रशिक्षण, कच्चा माल, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की व्यवस्था एक साथ उपलब्ध हो, तो यह ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है।
खास तौर पर धागाकरण और उससे जुड़े मूल्यवर्धित कार्यों को स्थानीय स्तर पर विकसित करने से रोजगार के अवसर उत्पादन क्षेत्र के आसपास ही बनाए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पैसा स्थानीय स्तर पर घूमने की संभावना बढ़ती है।
आगे क्या होना चाहिए?
2 अक्टूबर का प्रशिक्षण समारोह एक शुरुआत है। इसके बाद यदि विभाग नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार से सीधा संपर्क उपलब्ध कराता है, तो टसर रेशम बस्तर के ग्रामीण उद्योगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अगले चरण में उत्पादकों को ई-कॉमर्स, प्रदर्शनियों, सरकारी विपणन प्लेटफॉर्म और बड़े बाजारों से जोड़ना भी उपयोगी होगा। इससे केवल कच्चा रेशम बेचने के बजाय तैयार उत्पादों के जरिए अधिक मूल्य हासिल किया जा सकता है।



