वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ नील कात्याल ने ट्रंप को खुली चुनौती देते हुए कहा कि संविधान के तहत व्यापार और टैरिफ से जुड़े फैसले पूरी तरह एकतरफा नहीं लिए जा सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यपालिका की शक्तियां सीमित हैं और कांग्रेस की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कात्याल का तर्क है कि टैरिफ जैसे आर्थिक कदमों का व्यापक असर घरेलू उद्योग, उपभोक्ताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर पड़ता है, इसलिए इन्हें संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा सकती है।
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इस बयान के बाद अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय हित में निर्णायक कदम उठाने का अधिकार है, जबकि आलोचकों का मानना है कि संविधान की सीमाओं का पालन अनिवार्य है। टैरिफ विवाद अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि संवैधानिक बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।


