रायपुर। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र से जुड़े तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया पूरी हो गई है। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) के अनुसार नीलामी पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित कंपनी को तत्काल खनन शुरू करने का अधिकार मिल गया है। सफल बोलीदाता को खनन योजना, खनन पट्टा, वन स्वीकृति, पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने से पहले पेड़ों की कटाई या वास्तविक खनन गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती।
नौ कंपनियों ने लगाई बोली
CMDC के अनुसार तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धी नीलामी में कुल नौ बोलियां प्राप्त हुई थीं। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn-Gas and Chemicals Limited को मिला है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सफल बोली 37.50 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी पर हुई है। हालांकि, बोली सफल होने के बाद भी कंपनी को खनन शुरू करने से पहले निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
तारा कोल ब्लॉक हसदेव-अरण्य क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण इसकी नीलामी को लेकर पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्र, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। इस क्षेत्र में कोयला खनन को लेकर पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध तथा बहस होती रही है।
खनन शुरू करने से पहले पूरी करनी होंगी कई प्रक्रियाएं
CMDC ने स्पष्ट किया है कि केवल नीलामी में सफल होने से कंपनी को सीधे खनन शुरू करने की अनुमति नहीं मिलती। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सफल बोलीदाता को स्वीकृत खनन योजना तैयार कराने के साथ खनन पट्टा हासिल करना होगा। इसके अलावा वन क्षेत्र से संबंधित आवश्यक स्वीकृतियां, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और पर्यावरण मंजूरी सहित अन्य वैधानिक अनुमतियां भी लेनी होंगी।
इसका मतलब है कि नीलामी पूरी होने और वास्तविक खनन शुरू होने के बीच कई महत्वपूर्ण चरण बाकी हैं। जब तक संबंधित प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरियां नहीं मिल जातीं, तब तक पेड़ों की कटाई और खनन गतिविधियों को शुरू नहीं किया जा सकता। परियोजना को आगे बढ़ाने के दौरान मंजूरियों में निर्धारित शर्तों और पर्यावरणीय नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।
नीलामी, मंजूरी और खनन अलग-अलग चरण
तारा कोल ब्लॉक के मामले में नीलामी और खनन को एक ही प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा। नीलामी के जरिए सफल बोलीदाता का चयन हो चुका है, लेकिन इसके बाद खनन योजना, खनन पट्टा, वन स्वीकृति, पर्यावरण मंजूरी और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधि आगे बढ़ सकेगी।
अभी की स्थिति को इस तरह समझा जा सकता है:
- तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धी नीलामी पूरी हो चुकी है।
- सफल बोलीदाता का चयन हो चुका है।
- खनन शुरू करने के लिए आवश्यक वैधानिक मंजूरियां जरूरी हैं।
- वन एवं पर्यावरण से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
- आवश्यक मंजूरियों से पहले पेड़ों की कटाई और वास्तविक खनन शुरू नहीं किया जा सकता।
इसलिए नीलामी पूरी होने को परियोजना के अंतिम चरण के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह खनन परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया का एक चरण है, जबकि वास्तविक संचालन के लिए आगे की मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी।
लेमरू हाथी कॉरिडोर को लेकर क्या कहा गया?
तारा कोल ब्लॉक को लेकर लेमरू हाथी कॉरिडोर का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार नीलामी के लिए ब्लॉक को रखने से पहले इसकी सीमा में बदलाव किया गया था। मंत्रालय के अनुसार ब्लॉक के उस हिस्से को बाहर किया गया जो लेमरू हाथी कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आता था।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक तारा ब्लॉक को वर्ष 2023 में वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के लिए पेश किया गया था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया था। इसके बाद दिसंबर 2025 में राज्य सरकार की ओर से केंद्र को पत्र भेजे जाने और ब्लॉक को अगली नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने की बात सामने आई। इस पूरी प्रक्रिया में ब्लॉक की संशोधित सीमा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है।
हसदेव-अरण्य में नीलामी को लेकर राजनीतिक विवाद
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के बाद हसदेव-अरण्य क्षेत्र में खनन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य आलोचकों की ओर से इस परियोजना पर पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। विरोध करने वालों का तर्क है कि हसदेव क्षेत्र के घने जंगल और स्थानीय समुदायों के हितों को परियोजना के दौरान विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार और केंद्रीय स्तर पर सामने रखी गई जानकारी में कहा गया है कि नीलामी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और राज्य सरकार की संशोधित सिफारिश के आधार पर आगे बढ़ाई गई है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नीलामी अपने आप में वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरी नहीं है और सभी जरूरी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना खनन या पेड़ों की कटाई शुरू नहीं की जा सकती।
राज्य को राजस्व और रोजगार मिलने का अनुमान
तारा (Revised) कोल ब्लॉक को लेकर उपलब्ध सरकारी विवरणों में राज्य को परियोजना से सालाना 1,200 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने और 8,000 से अधिक रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान बताया गया है। हालांकि, ये अनुमान परियोजना के आगे बढ़ने, आवश्यक स्वीकृतियां मिलने और भविष्य में खनन संचालन शुरू होने की स्थिति से जुड़े हैं।
परियोजना से संभावित आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन भी महत्वपूर्ण रहेगा। हसदेव-अरण्य क्षेत्र की जैव विविधता, वन क्षेत्र, हाथियों की आवाजाही और स्थानीय आबादी से जुड़े विषयों को लेकर आने वाली वन एवं पर्यावरणीय मंजूरियों में निर्धारित शर्तों की भूमिका अहम होगी।
तारा कोल ब्लॉक पर अब आगे क्या होगा?
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पूरी होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरियों का है। सफल बोलीदाता को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत खनन योजना, खनन पट्टा, वन स्वीकृति, पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजना के वास्तविक संचालन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नीलामी पूरी होने का अर्थ तत्काल खनन शुरू होना नहीं है। हसदेव-अरण्य जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में परियोजना की आगे की प्रगति वन, पर्यावरण और अन्य वैधानिक मंजूरियों पर निर्भर करेगी। इसी वजह से तारा कोल ब्लॉक को लेकर आने वाले समय में आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव भी चर्चा के प्रमुख विषय बने रहेंगे।
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