Taiwan Strait: ताइवान के आसपास चीन की सैन्य हलचल बढ़ी, 3 PLA विमान और 5 PLAN जहाजों की गतिविधि दर्ज
ताइपे: ताइवान स्ट्रेट में चीन और ताइवान के बीच सैन्य तनाव का एक और संकेत सामने आया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 27 से 28 सितंबर की सुबह तक उसके आसपास चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 3 विमान, PLA Navy (PLAN) के 5 जहाज और 4 सरकारी जहाज सक्रिय पाए गए। इनमें से एक विमान ने ताइवान स्ट्रेट की तथाकथित मीडियन लाइन पार की और ताइवान के उत्तरी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में प्रवेश किया। ताइवान की सेना ने गतिविधियों की निगरानी करते हुए अपने गश्ती विमान, नौसैनिक जहाज और तटीय मिसाइल प्रणालियों को प्रतिक्रिया के लिए तैनात किया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि गतिविधियों की संख्या रोजाना एक जैसी नहीं रहती। 26 सितंबर को ताइवान ने 5 PLA विमान, 6 PLAN जहाज और 5 सरकारी जहाजों की मौजूदगी दर्ज की थी, जबकि 27 सितंबर को 2 PLA विमान, 5 PLAN जहाज और 6 सरकारी जहाजों की सूचना दी गई।
मीडियन लाइन पार करने का क्या मतलब है?
ताइवान स्ट्रेट की मीडियन लाइन लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक विभाजन रेखा की तरह काम करती रही है। हालांकि यह अंतरराष्ट्रीय संधि से निर्धारित सीमा नहीं है, लेकिन इसके पार सैन्य विमान की गतिविधि को ताइवान अपनी सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीरता से देखता है।
यहां एक और महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ADIZ किसी देश का संप्रभु हवाई क्षेत्र नहीं होता। यह ऐसा क्षेत्र है जहां सुरक्षा निगरानी के लिए आने वाले विमानों की पहचान और निगरानी की जाती है। इसलिए किसी विमान का ADIZ में प्रवेश अपने आप में किसी देश के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के समान नहीं माना जाता। फिर भी ताइवान के लिए मीडियन लाइन पार करने वाली सैन्य उड़ानें निगरानी और सैन्य प्रतिक्रिया की जरूरत बढ़ा देती हैं।
सिर्फ विमान नहीं, समुद्र में भी बढ़ रही मौजूदगी
ताइवान के आसपास चीन की गतिविधियों को केवल लड़ाकू विमानों की संख्या से देखना अधूरा होगा। हाल के आधिकारिक रिकॉर्ड में लगातार PLAN और सरकारी जहाजों की मौजूदगी भी दर्ज हुई है। 21 सितंबर को ताइवान ने 4 PLA विमान, 7 PLAN जहाज और 4 सरकारी जहाजों की गतिविधि बताई थी। इनमें चार विमानों के मीडियन लाइन पार कर ताइवान के विभिन्न ADIZ क्षेत्रों में प्रवेश करने की बात कही गई थी।
इसी तरह 8 सितंबर को 8 PLA विमान, 8 PLAN जहाज और 4 सरकारी जहाज दर्ज किए गए थे। इसका मतलब यह नहीं है कि हर दिन गतिविधि बढ़ रही है, लेकिन यह जरूर दिखता है कि ताइवान के आसपास सैन्य और सरकारी समुद्री गतिविधि नियमित सुरक्षा निगरानी का हिस्सा बन चुकी है।
रिसर्च जहाजों की गतिविधि क्यों चर्चा में है?
ताइवान के आसपास चीनी समुद्री गतिविधियों में सैन्य जहाजों के अलावा अनुसंधान और सर्वेक्षण गतिविधियां भी रणनीतिक महत्व रखती हैं। सितंबर में चीन ने ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में समुद्र तल का सर्वे किया था। चीन ने इसे समुद्री संसाधन और क्षेत्रीय योजना से जुड़ा सर्वे बताया, जबकि ताइवान ने इस गतिविधि का विरोध किया।
समुद्र की गहराई, भूगर्भीय संरचना और समुद्री परिस्थितियों से जुड़ा डेटा सैन्य दृष्टि से भी उपयोगी हो सकता है। खासकर पनडुब्बी संचालन और समुद्री निगरानी जैसे क्षेत्रों में समुद्र के भौगोलिक स्वरूप की जानकारी महत्वपूर्ण होती है। हालांकि किसी विशेष रिसर्च मिशन का सैन्य उद्देश्य था, ऐसा निष्कर्ष केवल गतिविधि के आधार पर निकालना उचित नहीं होगा।
ताइवान के लिए असली चुनौती क्या है?
ताइवान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ किसी एक दिन के विमानों या जहाजों की संख्या नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और प्रतिक्रिया बनाए रखने की आवश्यकता है।
हर बार जब सैन्य विमान या जहाज ताइवान के आसपास सक्रिय होते हैं, तो ताइवान को अपनी निगरानी प्रणालियों, गश्ती विमानों और नौसेना संसाधनों को सक्रिय रखना पड़ता है। लंबे समय तक ऐसी गतिविधियां जारी रहने पर संसाधनों, संचालन लागत और सैन्य तैयारी पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से ताइवान इन गतिविधियों को केवल अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा परिस्थिति के हिस्से के रूप में देखता है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
28 सितंबर की घटना को अपने आप में किसी सैन्य संघर्ष की शुरुआत मानना उचित नहीं होगा। ताइवान के आसपास PLA और PLAN की गतिविधियां पहले भी अलग-अलग स्तर पर सामने आती रही हैं। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड यह दिखाते हैं कि इन गतिविधियों की तीव्रता दिन-प्रतिदिन बदलती रहती है।
आगे सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि क्या ऐसी गतिविधियां सीमित दैनिक गश्त और दबाव की रणनीति तक रहती हैं या इनमें बड़े सैन्य अभ्यास, ज्यादा विमानों की तैनाती, व्यापक नौसैनिक गतिविधियां अथवा लंबे समय तक चलने वाली समुद्री मौजूदगी शामिल होती है।



