सरगुजा में करंट का जानलेवा जाल: फसल बचाने की कोशिश में युवक की दर्दनाक मौत, शव ले जाने में भी हुई परेशानी
सरगुजा। जंगली जानवरों से फसल बचाने की मजबूरी जब असुरक्षित तरीके से पूरी की जाती है, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है, लखनपुर क्षेत्र की एक घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है। खेत की सुरक्षा के लिए बिछाए गए करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक जुगेश्वर पावले की मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार को एक और परेशानी का सामना करना पड़ा—पोस्टमॉर्टम के बाद शव गांव तक पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था समय पर नहीं हो सकी।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह खेती की सुरक्षा, बिजली के खतरनाक इस्तेमाल और ग्रामीण इलाकों में आपात सेवाओं की उपलब्धता से जुड़े गंभीर सवाल भी सामने लाती है।
फसल बचाने का उपाय बना मौत का कारण
लखनपुर क्षेत्र में कुन्नी चौकी के अंतर्गत रेम्हला और लब्जी गांवों के बीच झिलमिली जंगल में यह घटना हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुगेश्वर ने जंगली सूअरों से फसल बचाने के लिए खेत के चारों ओर जीआई तार लगाया था और उसे पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से जोड़ दिया था।
बुधवार तड़के वह खेत पहुंचा। इसी दौरान वह करंट प्रवाहित तार की चपेट में आ गया। परिजन उसकी तलाश कर रहे थे, लेकिन दोपहर बाद खेत में उसका शव मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को लखनपुर अस्पताल भेजा गया।
इस घटना में सबसे अहम बात यह है कि खेत के आसपास लगाया गया ऐसा तार केवल जंगली जानवरों के लिए खतरा नहीं होता। वह किसान, परिवार के सदस्य, खेत में काम करने वाले मजदूर या अनजाने में वहां पहुंचने वाले किसी भी व्यक्ति की जान ले सकता है। हाई-वोल्टेज बिजली से जुड़ा तार विशेष रूप से घातक होता है और उसे छूने के लिए सीधे बिजली के तार तक पहुंचना भी जरूरी नहीं कि व्यक्ति सुरक्षित रहे।
जंगली जानवरों से फसल बचाना किसानों के सामने वास्तविक चुनौती
कई ग्रामीण इलाकों में जंगली सूअर और दूसरे वन्यजीव खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। किसान महीनों मेहनत, बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च करने के बाद फसल तैयार होने की उम्मीद करते हैं। ऐसे में रातोंरात फसल नष्ट होने का डर आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
लेकिन फसल बचाने के लिए हाई-वोल्टेज लाइन से तार जोड़ना सुरक्षित समाधान नहीं है। इससे जानवरों के साथ-साथ इंसानों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किसानों तक सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्पों की जानकारी पहुंचाना जरूरी है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वन विभाग और कृषि विभाग की मदद, सुरक्षित बाड़ लगाने के उपाय तथा वन्यजीवों से होने वाले नुकसान की शिकायत और आकलन की व्यवस्था इस दिशा में उपयोगी हो सकती है।
किसानों को केवल खतरे के बारे में चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि फसल का नुकसान बार-बार हो रहा है, तो उन्हें ऐसी व्यवस्था भी चाहिए जिससे नुकसान की सूचना देना, उचित सलाह प्राप्त करना और उपलब्ध सहायता तक पहुंचना आसान हो।
हादसे के बाद शव वाहन की परेशानी ने बढ़ाया परिवार का दुख
जुगेश्वर की मौत के बाद परिजनों को शव गांव ले जाने के लिए भी कठिनाई का सामना करना पड़ा। रात होने के कारण बुधवार को पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने में समस्या आई। जानकारी के अनुसार, शव वाहन का चालक मौजूद नहीं था।
इसके बाद जीवन दीप समिति के चालक से संपर्क किया गया, लेकिन उसने लगातार ड्यूटी का हवाला देते हुए वाहन ले जाने से इनकार कर दिया। उसने इस संबंध में मंत्री राजेश अग्रवाल को फोन पर जानकारी दी। इसके बाद मामला और उलझ गया तथा मौके पर हंगामे जैसी स्थिति बनने की बात सामने आई।
मंत्री के निर्देश पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष दिनेश साहू और नगर पंचायत अध्यक्ष मौके पर पहुंचे। उनके हस्तक्षेप के बाद शव को गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
परिवार के लिए किसी सदस्य की अचानक मौत अपने आप में असहनीय आघात होती है। ऐसे समय में परिवहन की व्यवस्था के लिए बार-बार भटकना मानसिक पीड़ा को और बढ़ा सकता है। यह स्थिति बताती है कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में इलाज और पोस्टमॉर्टम के साथ-साथ शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
प्रशासन के सामने दो अलग-अलग जिम्मेदारियां
इस घटना से जुड़े सवालों को दो स्तरों पर देखना जरूरी है।
पहला, खेतों में जानलेवा करंट फैलाने जैसी घटनाओं की रोकथाम। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनों के आसपास सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता, स्थानीय स्तर पर निगरानी और खतरनाक विद्युत व्यवस्था की सूचना मिलने पर समय पर कार्रवाई जरूरी है। ऐसे मामलों में कानून के तहत जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
दूसरा, अस्पतालों और संबंधित समितियों के माध्यम से उपलब्ध शव वाहन सेवाओं का संचालन। वाहन की उपलब्धता के साथ चालक की ड्यूटी, वैकल्पिक चालक और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। किसी कर्मचारी की अनुपलब्धता के कारण परिवार को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
आगे ऐसी मौतें रोकने के लिए क्या जरूरी है?
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। खेतों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले बिजली के तारों पर निगरानी और किसानों को सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में नियमित प्रयास जरूरी हैं। गांवों में यह संदेश भी स्पष्ट रूप से पहुंचना चाहिए कि हाई-वोल्टेज बिजली से तार जोड़ना जानलेवा है और इससे दूर रहना अनिवार्य है।
साथ ही, ग्रामीण अस्पतालों में शव वाहन सेवा की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वाहन उपलब्ध न होने या चालक की अनुपस्थिति की स्थिति में किसे सूचना दी जाएगी और वैकल्पिक व्यवस्था कौन करेगा, इसका स्पष्ट प्रोटोकॉल होना चाहिए।
जुगेश्वर पावले की मौत ने एक परिवार से उसका युवा सदस्य छीन लिया। इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। लेकिन घटना से मिले सबक के आधार पर यदि खेतों में बिजली के खतरनाक इस्तेमाल को रोका जाए और आपात सेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाया जाए, तो भविष्य में दूसरे परिवारों को ऐसी पीड़ा से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।



