Supreme Court of India ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े 2019 के अपने अहम फैसले में संशोधन के संकेत दिए हैं। अदालत ने हालिया सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की कि वर्ष 2018 से पहले के भूमि अधिग्रहण मामलों में ब्याज भुगतान को लेकर दोबारा विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की व्याख्या में संतुलन और न्यायसंगतता बनाए रखना जरूरी है, खासकर उन मामलों में जहां अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है।
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दरअसल, 2019 के फैसले में मुआवजे और उस पर मिलने वाले ब्याज को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे, जिससे कई राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया था। अब शीर्ष अदालत इस पहलू की पुनः समीक्षा कर सकती है, जिससे 2018 से पहले के मामलों में ब्याज पर रोक या सीमित भुगतान का रास्ता खुल सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका असर हजारों लंबित मामलों और राज्य सरकारों की वित्तीय देनदारियों पर पड़ सकता है।






