Sitapur Accident: दर्दनाक हादसा! नेशनल हाईवे के गड्ढे ने ली 70 वर्षीय व्यापारी की जान, ट्रेलर के पहिए के नीचे आया स्कूटी सवार
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर-रायगढ़ मार्ग पर एक बार फिर सड़क की बदहाल स्थिति और यातायात सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरगुजा जिले के सीतापुर में नेशनल हाईवे-43 के सेंट्रल बैंक चौक पर शुक्रवार शाम हुए भीषण हादसे में 70 वर्षीय व्यवसायी त्रिलोक चंद गोयल की जान चली गई। बताया जा रहा है कि उनकी स्कूटी सड़क के गड्ढे में अनियंत्रित होकर गिर गई और इसी दौरान पीछे से गुजर रहे ट्रेलर का पहिया उनकी चपेट में आ गया।
इस दुर्घटना ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। साथ ही यह सवाल भी सामने आया है कि आखिर खराब सड़कों पर सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? खासकर ऐसे राष्ट्रीय राजमार्ग पर, जहां भारी वाहनों और दोपहिया चालकों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
बाजार जाने निकले व्यापारी की रास्ते में दर्दनाक मौत
जानकारी के अनुसार, त्रिलोक चंद गोयल (70) किराना के थोक व्यापारी थे और निहारिका स्टोर्स का संचालन करते थे। शुक्रवार शाम करीब छह बजे वे अपनी स्कूटी से बाजार की ओर जा रहे थे।
जब वे सीतापुर के सेंट्रल बैंक चौक पहुंचे, तभी सड़क की खराब स्थिति के कारण उनकी स्कूटी अनियंत्रित हो गई। वे वाहन समेत सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान पीछे से आ रहे ट्रेलर के पिछले पहिए की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और जाम की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर सीतापुर पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था संभाली।
सड़क के गड्ढे और भारी वाहनों का दबाव बना गंभीर जोखिम
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, वहां सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। बारिश के कारण सड़क की हालत और बिगड़ गई थी।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर गड्ढे केवल वाहन चलाने में असुविधा पैदा नहीं करते, बल्कि दोपहिया चालकों के लिए जानलेवा जोखिम भी बन सकते हैं। खासकर तब, जब सड़क पर एक साथ भारी ट्रेलर, ट्रक, बस और छोटे वाहन चल रहे हों।
दोपहिया वाहन का संतुलन बिगड़ने पर चालक के पास खुद को संभालने के लिए बहुत कम समय होता है। यदि पीछे से भारी वाहन आ रहा हो, तो दुर्घटना की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।
इसलिए सड़क की मरम्मत को केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का विषय माना जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने किया था सड़क निर्माण का भूमिपूजन, फिर भी उठे सवाल
इस हादसे के बाद सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, दुर्घटना से एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने इसी सड़क के नवनिर्माण कार्य का भूमिपूजन किया था।
नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू होना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन जब तक सड़क पूरी तरह तैयार नहीं होती, तब तक मौजूदा मार्ग पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
भूमिपूजन के बाद निर्माण कार्य पूरा होने में समय लग सकता है। इस बीच सड़क के खतरनाक हिस्सों की अस्थायी मरम्मत, गड्ढों की भराई, चेतावनी बोर्ड और यातायात नियंत्रण जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।
विशेष रूप से सेंट्रल बैंक चौक जैसे व्यस्त स्थानों पर भारी वाहनों की आवाजाही और दोपहिया चालकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
हादसे के बाद शव को अस्पताल पहुंचाने में भी हुई देरी
दुर्घटना के बाद एक और गंभीर पहलू सामने आया। स्थानीय जानकारी के अनुसार, मृतक का शव करीब एक घंटे तक घटनास्थल पर पड़ा रहा और इस दौरान अस्पताल की एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी।
बाद में पुलिसकर्मियों ने स्ट्रेचर की मदद से शव को लगभग 100 मीटर तक पहुंचाया। इसके बाद ऑटो के माध्यम से शव को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मर्च्युरी में रखा गया।
यह स्थिति आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और दुर्घटना स्थलों पर त्वरित सहायता की व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। सड़क हादसों में गोल्डन आवर यानी दुर्घटना के बाद शुरुआती महत्वपूर्ण समय घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिहाज से बेहद अहम होता है।
ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्त चौराहों के आसपास एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पतालों के बीच समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है।
पुलिस जांच में स्पष्ट होगी दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां
सीतापुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, ट्रेलर की भूमिका क्या रही और सड़क की स्थिति ने हादसे में किस हद तक योगदान दिया, इन पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यदि सड़क की खराब स्थिति दुर्घटना का कारण बनी है, तो संबंधित विभागों को भी इसका संज्ञान लेकर आवश्यक सुधार करने चाहिए। साथ ही भारी वाहन चालकों को भी भीड़भाड़ वाले चौराहों पर गति और सुरक्षित दूरी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अब जरूरी है जवाबदेही, ताकि दोबारा न जाए किसी की जान
त्रिलोक चंद गोयल की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है। यह सड़क निर्माण, रखरखाव और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को सामने लाती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले नागरिकों को सुरक्षित सड़क मिलना बुनियादी अपेक्षा है। सड़क का नया निर्माण भविष्य के लिए जरूरी हो सकता है, लेकिन वर्तमान में मौजूद गड्ढों और खतरनाक हिस्सों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब प्रशासन और संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों के सामने चुनौती है कि दुर्घटनास्थल का निरीक्षण कर तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाएं। क्योंकि सड़क विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल बेहतर रास्ते बनाना नहीं, बल्कि उस रास्ते पर चलने वाले हर व्यक्ति की जिंदगी सुरक्षित रखना भी है।




