मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है। सऊदी अरब ने हाल ही में ऐलान किया है कि वह इज़रायल के साथ राजनयिक संबंधों की बहाली पर विचार कर रहा है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) अपने आगामी अमेरिका दौरे की तैयारी कर रहे हैं। यह कदम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है।
सऊदी-इज़रायल के बीच नई शुरुआत
सऊदी अरब ने लंबे समय तक इज़रायल के साथ किसी भी औपचारिक संबंध से दूरी बनाए रखी थी। लेकिन अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। सऊदी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “शांति और स्थिरता के हित में हम सभी देशों के साथ संवाद के लिए खुले हैं।” यह बयान संकेत देता है कि रियाद अब इज़रायल को लेकर अपनी नीति में लचीलापन ला रहा है।
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत अमेरिका की मध्यस्थता से हुई है। बाइडेन प्रशासन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों ने ही अरब देशों को इज़रायल के साथ सामान्य संबंध स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया था।
अमेरिका दौरे से पहले रणनीतिक संदेश
क्राउन प्रिंस सलमान का यह ऐलान उनके अमेरिका दौरे से ठीक पहले आया है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा और निवेश साझेदारी को और मजबूत करना है। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घोषणा वॉशिंगटन के लिए एक “राजनयिक संकेत” भी है — कि सऊदी अरब अब वैश्विक कूटनीति में स्वतंत्र भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है।
इज़रायल ने किया स्वागत
इज़रायल ने सऊदी अरब के इस रुख का खुले दिल से स्वागत किया है। इज़रायली प्रधानमंत्री ने कहा कि “यह कदम मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में ऐतिहासिक हो सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग तभी बढ़ेगा जब दोनों पक्षों में विश्वास और आपसी समझ मजबूत होगी।
ट्रंप की प्रतिक्रिया — “खुश या नाराज़?”
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने अब्राहम समझौते के ज़रिए इज़रायल को कई अरब देशों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी, इस खबर पर मिश्रित प्रतिक्रिया दे सकते हैं। ट्रंप समर्थकों का कहना है कि सऊदी-इज़रायल वार्ता उन्हीं की नीतियों का परिणाम है, जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि MBS का यह कदम ट्रंप की “कूटनीतिक सफलता” को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश है।
क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव
सऊदी अरब और इज़रायल के बीच संभावित साझेदारी से ईरान, कतार और तुर्की जैसे देशों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अरब जगत में भी राय बंटी हुई है — कुछ इसे “शांति की दिशा में साहसिक कदम” बता रहे हैं, तो कुछ इसे “फिलिस्तीन के मुद्दे से दूरी” के रूप में देख रहे हैं।


