विदेश मंत्री एस. जयशंकर आगामी 12 नवंबर से कनाडा के चार दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों में एक बार फिर से नई गर्माहट लाने वाला माना जा रहा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव के बाद यह पहला उच्च-स्तरीय संपर्क है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार के संकेत मिलेंगे।
तनाव के बाद कूटनीति की नई शुरुआत
पिछले वर्ष खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव देखा गया था। भारत ने कनाडा से सख्त रुख अपनाया था और कई राजनयिक गतिविधियां सीमित कर दी थीं। अब इस दौरे को एक “रीसेट मिशन” के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली के बीच होने वाली मुलाकात में दोनों देश सुरक्षा, शिक्षा, निवेश और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा करेंगे।
व्यापार और निवेश पर होगा बड़ा फोकस
भारत और कनाडा के बीच पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 9 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। जयशंकर इस दौरे में भारतीय कंपनियों को कनाडा में निवेश बढ़ाने और टेक्नोलॉजी तथा क्लीन एनर्जी क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे। विशेष रूप से, लिथियम, कृषि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।
शिक्षा और छात्रों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा
कनाडा में इस समय करीब 7 लाख भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो भारत की सबसे बड़ी प्रवासी छात्र आबादी में से एक है। हाल ही में वीज़ा देरी और नस्लीय घटनाओं को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। विदेश मंत्री इस दौरे में भारतीय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को आसान करने पर कनाडा सरकार से चर्चा करेंगे।
सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त संदेश
भारत लंबे समय से कनाडा से यह मांग करता रहा है कि वह अपने यहां सक्रिय खालिस्तान समर्थक संगठनों पर लगाम लगाए। जयशंकर इस मुद्दे को फिर से प्रमुखता से उठाने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि भारत यह स्पष्ट करेगा कि आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति शून्य-सहनशीलता नीति उसकी विदेश नीति का हिस्सा है।
भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत
कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दौरा दोनों देशों के लिए “संबंधों को रीसेट करने का सही समय” है। भारत और कनाडा दोनों ही G20 साझेदार हैं और जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आपूर्ति शृंखला और डिजिटल इकोनॉमी जैसे विषयों पर साथ मिलकर काम कर सकते हैं।जयशंकर का यह दौरा इस दिशा में भरोसे की नई नींव रखने की कोशिश होगी।


