छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। राज्य में बीते वित्तीय वर्ष के दौरान शराब की बिक्री से करीब 10,751 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। आबकारी विभाग के आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। शराब बिक्री में हुई बढ़ोतरी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि एक ओर नशामुक्ति की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर शराब बिक्री से राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि बढ़ती शराब खपत सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं को जन्म दे सकती है। वहीं सरकार का पक्ष है कि आबकारी नीति के बेहतर प्रबंधन और अवैध शराब पर नियंत्रण के कारण राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई है।
शराब बिक्री के रिकॉर्ड आंकड़ों ने प्रदेश में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि आम जनता के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।





