रायपुर में अवैध शराब तस्करी का बड़ा खुलासा! झारखंड से 660 KM बाइक चलाकर पहुंचा आरोपी, 30.3 लीटर शराब जब्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दूसरे राज्य से शराब लाकर बेचने के मामले में आबकारी विभाग ने कार्रवाई की है। झारखंड के बोकारो से बाइक के जरिए शराब लेकर पहुंचे एक व्यक्ति को टीम ने घेराबंदी कर पकड़ा। उसके पास से रॉयल ब्रांड की 30.3 लीटर देशी शराब बरामद की गई है। विभाग के मुताबिक, आरोपी करीब 660 किलोमीटर की दूरी तय कर रायपुर पहुंचा था।
इस कार्रवाई में मुखबिर से मिली सूचना अहम रही। अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना होगा कि शराब रायपुर में किसे बेची जानी थी और क्या इस तस्करी के पीछे कोई स्थानीय नेटवर्क भी सक्रिय था।
मुखबिर की सूचना पर नरदहा-चंद्रखुरी मार्ग पर कार्रवाई
आबकारी विभाग को झारखंड से शराब लाकर रायपुर में बेचने की सूचना मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने नरदहा-चंद्रखुरी मार्ग पर निगरानी और जांच शुरू की। इसी दौरान चंद्रखुरी की ओर से बाइक पर आ रहे संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी ली गई।
तलाशी में रॉयल ब्रांड की 30.3 लीटर देशी शराब मिली। आरोपी की पहचान झारखंड के बोकारो निवासी राजेश प्रसाद सिंह के रूप में बताई गई है। आबकारी टीम ने शराब जब्त कर उसके खिलाफ कार्रवाई की।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी आशीष सिंह के अनुसार, यह कार्रवाई विभाग को मिली सूचना के आधार पर की गई। उपायुक्त प्रवीण शर्मा की निगरानी में टीम ने अभियान चलाया।
660 किलोमीटर की दूरी, लेकिन असली सवाल बिक्री के नेटवर्क का
बोकारो से रायपुर तक बाइक से शराब पहुंचाने का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतरराज्यीय तस्करी केवल शराब की ढुलाई तक सीमित नहीं रहती। इसके पीछे संभावित खरीदार, बिक्री के ठिकाने और परिवहन के तरीकों की कड़ियां भी हो सकती हैं। हालांकि, इस मामले में किसी बड़े नेटवर्क की मौजूदगी की पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि आरोपी शराब कहां से लेकर चला था, रायपुर में इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी और क्या इससे पहले भी ऐसी खेप पहुंचाई गई थी। इन सवालों के जवाब मिलने पर तस्करी के पूरे तरीके को समझने में मदद मिल सकती है।
दूसरे राज्य की शराब रायपुर क्यों पहुंच रही है?
अंतरराज्यीय शराब तस्करी के पीछे कीमतों में अंतर, बिक्री से जुड़े नियमों और अवैध बाजार में मुनाफे की संभावना जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, इस विशेष मामले में तस्करी की वजह क्या थी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
ऐसे मामलों में सिर्फ शराब जब्त कर लेना पर्याप्त नहीं होता। यदि शराब के संभावित खरीदारों और आपूर्ति की अगली कड़ी तक जांच पहुंचती है, तो भविष्य में इसी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, दूसरे राज्य से लाई गई शराब की वैधता, परिवहन से जुड़े नियमों और बिक्री की अनुमति की जांच भी महत्वपूर्ण है। आबकारी कानूनों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कलेक्टर के निर्देश पर सख्ती, आगे की जांच अहम
आबकारी अधिकारियों के अनुसार, रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने शराब तस्करी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में विभाग ने सूचना के आधार पर घेराबंदी कर यह कार्रवाई की।
अब मामले में आगे की जांच से यह सामने आ सकता है कि बरामद शराब केवल एक व्यक्ति के जरिए लाई जा रही थी या इसके पीछे स्थानीय स्तर पर बिक्री की कोई व्यवस्था भी थी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई में 30.3 लीटर शराब जब्त की गई है और आरोपी को पकड़ा गया है।
यह मामला बताता है कि अवैध शराब की आपूर्ति रोकने के लिए सीमावर्ती जांच के साथ-साथ शहरों में बिक्री के संभावित ठिकानों की पहचान भी जरूरी है। तस्करी की पूरी श्रृंखला सामने आने पर ही ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।



