पीएम मोदी का दिसंबर में अमेरिका दौरा संभव, ट्रंप से मुलाकात में टैरिफ और रूसी तेल पर हो सकती है अहम बातचीत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में अमेरिका दौरे की संभावनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी 14-15 दिसंबर को फ्लोरिडा के डोराल स्थित ट्रंप नेशनल डोराल मियामी में होने वाले G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, 23 सितंबर 2026 तक भारत सरकार की ओर से उनकी यात्रा को लेकर औपचारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।
अगर यह दौरा होता है, तो G20 बैठक के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता की भी संभावना है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सितंबर में संकेत दिया था कि ट्रंप G20 में मोदी से अलग मुलाकात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि मोदी की संभावित यात्रा केवल बहुपक्षीय बैठक तक सीमित नहीं रह सकती।
बातचीत का केंद्र केवल टैरिफ नहीं होगा
मोदी-ट्रंप मुलाकात होती है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की मौजूदा स्थिति सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकती है। दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं, जबकि इसी बीच रूस से भारत की ऊर्जा खरीद ने अमेरिकी व्यापार नीति को जटिल बना दिया है।
इस मामले में सितंबर का घटनाक्रम खास महत्व रखता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 2026 के रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, कानून अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं करता; अंतिम कार्रवाई और दर का फैसला अमेरिकी प्रशासन को करना होगा।
यही अंतर इस मुद्दे को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल चर्चा किसी निश्चित 100 प्रतिशत शुल्क की नहीं, बल्कि अमेरिका के पास उपलब्ध नए कानूनी विकल्प की है।
रूसी तेल और भारत की ऊर्जा सुरक्षा क्यों बड़ा मुद्दा है?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। रूस हाल के वर्षों में भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। इसलिए रूसी तेल को लेकर अमेरिकी दबाव का असर केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भारत के ऊर्जा बाजार और आयात लागत से भी जुड़ जाता है।
हालांकि हालिया आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में कमी दिखाई दी है। रॉयटर्स के अनुसार, अगस्त 2026 में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात 16.5 प्रतिशत घटकर लगभग 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा और सितंबर के लिए शुरुआती आंकड़े करीब 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन का संकेत दे रहे हैं। इसके साथ भारतीय रिफाइनरों ने अन्य आपूर्तिकर्ताओं से खरीद बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
इससे संकेत मिलता है कि भारत एक तरफ ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और दूसरी तरफ बदलते वैश्विक प्रतिबंधों के बीच अपने व्यापारिक विकल्पों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी नजर
मोदी-ट्रंप संभावित वार्ता का दूसरा बड़ा पक्ष व्यापार समझौता हो सकता है। फरवरी 2026 में अमेरिका ने भारत से जुड़ी अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ दर हटाने और अमेरिकी प्रशासन द्वारा घोषित पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। यह कदम भारत के रूसी तेल खरीद से जुड़े अमेरिकी रुख में उस समय आए बदलाव के साथ जुड़ा था।
अब रूस से ऊर्जा खरीद पर अमेरिकी कानून के नए प्रावधानों के बाद व्यापार वार्ता का वातावरण फिर जटिल हो गया है। भारत के लिए चुनौती यह है कि अमेरिका के साथ बाजार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाया जाए, लेकिन साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़े विकल्प भी खुले रहें।
इसलिए दिसंबर की संभावित बैठक में किसी एक मुद्दे पर बातचीत होने के बजाय व्यापार, ऊर्जा, प्रतिबंध और रणनीतिक सहयोग एक-दूसरे से जुड़े विषयों के रूप में सामने आ सकते हैं।
Quad बैठक से बढ़ सकता है रणनीतिक महत्व
G20 के दौरान भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह Quad की नेताओं की बैठक की संभावना पर भी काम चल रहा है। सितंबर में चारों देशों के Quad शेरपाओं की बैठक दिल्ली में हुई थी और अगले नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा हुई थी।
Quad के एजेंडे में समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, उभरती तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और आपदा राहत जैसे विषय शामिल हैं। मई 2026 की Quad विदेश मंत्रियों की बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों और इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी पहल सामने आई थी।
अगर G20 के आसपास Quad नेताओं की बैठक भी होती है, तो मोदी की संभावित अमेरिका यात्रा को केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय दौरे के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह व्यापक इंडो-पैसिफिक और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर बातचीत का भी मंच बन सकती है।
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दिसंबर की बैठक क्यों महत्वपूर्ण होगी?
14-15 दिसंबर को होने वाला G20 Leaders’ Summit अमेरिका की मेजबानी में ट्रंप नेशनल डोराल मियामी में आयोजित होना निर्धारित है। अमेरिकी ट्रेजरी और अन्य अमेरिकी सरकारी स्रोत भी इन तारीखों और आयोजन स्थल की पुष्टि कर चुके हैं।
ऐसे समय में मोदी-ट्रंप की संभावित बातचीत कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकती है। एक तरफ अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, दूसरी तरफ भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने की नीति पर जोर दे रहा है। इसी के साथ दोनों देश रक्षा, तकनीक, निवेश और व्यापक व्यापार संबंधों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।
इसलिए दिसंबर तक परिस्थितियों में बदलाव होने की संभावना बनी रहेगी। सबसे अहम सवाल यह होगा कि भारत और अमेरिका व्यापार तथा ऊर्जा सुरक्षा के बीच ऐसा रास्ता कैसे तलाशते हैं, जिसमें दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंध प्रभावित न हों।



