PM Modi के सामने गूंजा ‘Parvati’, Bhajan Clubbing में दिखा भक्ति और युवाओं के नए संगीत का संगम
नई दिल्ली: भक्ति संगीत को पारंपरिक मंचों से निकालकर युवाओं के बीच नए अंदाज में पेश करने का चलन अब तेजी से दिखाई दे रहा है। दिल्ली में आयोजित एक Bhajan Clubbing कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के दौरान फिल्म ‘Hanuman Ansh’ का लोकप्रिय भजन ‘Parvati’ भी प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद युवा दर्शकों के साथ प्रधानमंत्री को संगीत का आनंद लेते और ताल देते हुए देखा गया।
यह कार्यक्रम 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की खासियत यह रही कि यहां पारंपरिक भक्ति संगीत को आधुनिक कॉन्सर्ट जैसे माहौल के साथ जोड़ा गया।
‘Parvati’ की लोकप्रियता ने बदला फिल्म का संगीत सफर
‘Hanuman Ansh’ का ‘Parvati’ गाना पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में है। गाने को Sadhu S. Tiwari ने गाया, लिखा और कंपोज किया है। इसकी प्रस्तुति पारंपरिक धार्मिक संगीत और आधुनिक डिजिटल ऑडियंस के बीच एक अलग तरह का मेल दिखाती है।
गाने की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसका सोशल मीडिया पर तेजी से फैलना भी रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भजन की पहुंच अब केवल धार्मिक दर्शकों तक सीमित नहीं रहती। छोटे वीडियो, रील्स और यूजर-जनरेटेड कंटेंट किसी गीत को ऐसे दर्शकों तक भी पहुंचा सकते हैं, जो नियमित रूप से पारंपरिक भजन नहीं सुनते।
यही बदलाव ‘Bhajan Clubbing’ जैसे आयोजनों के पीछे दिखाई देता है, जहां भक्ति संगीत को लाइव परफॉर्मेंस, आधुनिक साउंड और युवा-केंद्रित माहौल के साथ पेश किया जाता है।
PM Modi की मौजूदगी से कार्यक्रम चर्चा में आया
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस आयोजन को अतिरिक्त सार्वजनिक ध्यान दिलाया। उपलब्ध वीडियो और रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने प्रस्तुति के दौरान तालियां बजाईं और खंजरी बजाते हुए भी नजर आए। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम का वीडियो साझा करते हुए इसे “Spectacular!” बताया।
फिल्म से जुड़े कलाकारों और निर्देशक के लिए भी यह क्षण खास रहा। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि टीम कार्यक्रम में अपने गीतों की प्रस्तुति के लिए पहुंची थी और प्रधानमंत्री की मौजूदगी की जानकारी बाद में मिली। उनके अनुसार युवा दर्शकों के बीच फिल्म के गीतों की प्रस्तुति और प्रधानमंत्री की मौजूदगी का संयोजन उनके लिए भावनात्मक अनुभव था।
‘Hanuman Ansh’ में आध्यात्मिक विषय को केंद्र में रखा गया
विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित ‘Hanuman Ansh’ नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित फिल्म है। फिल्म का विषय भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक अनुभवों से जुड़ा है।
निर्देशक ने आध्यात्मिक विषयों पर फिल्म बनाने की चुनौती के बारे में भी बात की है। उनका कहना है कि ऐसे विषयों को पर्दे पर उतारते समय संवेदनशीलता और विषय के प्रति विश्वास महत्वपूर्ण होता है। उनके अनुसार किसी भी विषय को फिल्म में प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति का अपना दृष्टिकोण कहानी की दिशा को प्रभावित करता है।
यह बात इस फिल्म के संदर्भ में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर बनी फिल्मों में केवल कहानी कहना पर्याप्त नहीं होता। दर्शक अक्सर ऐसे विषयों से भावनात्मक और व्यक्तिगत स्तर पर भी जुड़े होते हैं। इसलिए फिल्मकार के लिए रचनात्मक स्वतंत्रता और विषय की संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखना अहम हो जाता है।
Bhajan Clubbing क्यों बन रहा है युवाओं के बीच चर्चा का विषय?
भक्ति संगीत के पारंपरिक स्वरूप में आम तौर पर मंदिर, धार्मिक आयोजन या शांत संगीत का वातावरण दिखाई देता है। इसके विपरीत Bhajan Clubbing में उसी संगीत को आधुनिक मंच, लाइव इंस्ट्रूमेंट्स, रोशनी और सामूहिक भागीदारी के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
इस बदलाव को केवल संगीत की शैली में परिवर्तन के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह इस बात का संकेत भी है कि युवा पीढ़ी पारंपरिक सांस्कृतिक सामग्री को अपने परिचित डिजिटल और मनोरंजन प्रारूपों के साथ जोड़कर देख रही है।
सोशल मीडिया ने इस बदलाव को और गति दी है। कोई भजन यदि रील या शॉर्ट वीडियो में लोकप्रिय होता है, तो उसकी पहुंच किसी एक कार्यक्रम या फिल्म की सीमा से बहुत आगे निकल सकती है। ‘Parvati’ के साथ भी सोशल मीडिया पर ऐसी ही तेजी देखने को मिली है।
आगे धार्मिक संगीत और सिनेमा के लिए क्या संकेत?
‘Parvati’ की लोकप्रियता और दिल्ली के Bhajan Clubbing कार्यक्रम की चर्चा एक व्यापक बदलाव की ओर संकेत करती है। आने वाले समय में फिल्म निर्माता और संगीतकार आध्यात्मिक तथा लोक-सांस्कृतिक विषयों को युवा दर्शकों के लिए नए संगीत और विजुअल फॉर्मेट में प्रस्तुत करने पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।
हालांकि किसी एक गाने या कार्यक्रम की लोकप्रियता को पूरे दर्शक वर्ग की पसंद का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। डिजिटल ट्रेंड तेजी से बदलते हैं और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता का वास्तविक सांस्कृतिक प्रभाव लंबे समय में ही स्पष्ट होता है।



