जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान की ओर से आतंकी शिविरों के पुनर्निर्माण को लेकर निशाना साधा। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘7 मई को भारत ने पाकिस्तान में 9 आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट किया था, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मुरिदके भी शामिल था।’ उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर जुटाए गए दान का उपयोग मुरिदके में आतंकी मुख्यालय के र्निर्माण के लिए किया जा रहा है। वैद ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया कि इस पुनर्निर्माण पर करीब 15 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसमें से 4 करोड़ रुपये पाकिस्तान सरकार ने दिए हैं।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान के लोगों से अपील की कि वे अपने शासकों और सेना के जनरलों की सच्चाई समझें, जो बाढ़ प्रभावित गरीब लोगों की मदद करने के बजाय सरकारी धन को आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा करने में लगा रहे हैं। वैद ने कहा कि यह धन वास्तव में उन गरीब लोगों के लिए होना चाहिए था, जो पाकिस्तान में भयानक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग इस बात पर गौर करें कि उनके देश में किस तरह की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।
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मुरिदके मुख्यालय को लेकर क्या मिली सूचना
लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके स्थित मुख्यालय 7 मई को भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सिंदूर में सटीक हमलों से ध्वस्त कर दिया गया। इस हमले ने कैडर आवास, हथियार भंडारण और प्रमुख इमारतों को नष्ट कर दिया, जिससे एलईटी का कमांड हब बुरी तरह प्रभावित हुआ। ताजा खुफिया जानकारी से पता चलता है कि पाकिस्तान इस आतंकी संगठन के पुनर्निर्माण के लिए धन मुहैया करा रहा है। कमांडर मौलाना अबू जर और यूनुस शाह बुखारी इस प्रोजेक्ट की देखरेख कर रहे हैं, जिसकी समय सीमा 5 फरवरी 2026 तय की गई है। यह तारीख एलईटी की वार्षिक कश्मीर एकजुटता दिवस सभा के साथ मेल खाती है। डोजियर के अनुसार, एलईटी कैडरों ने बाढ़ राहत के नाम पर धन उगाही अभियान शुरू किया। यह एक ऐतिहासिक पैटर्न को दोहराता है, जहां मानवीय सहायता को आतंकी बुनियादी ढांचे के लिए मोड़ दिया जाता है।


