ओडिशा सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाली और उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से अपनी माओवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास (Surrender & Rehabilitation) नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई नीति का लक्ष्य अधिक से अधिक माओवादी कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है।
नई संशोधित नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को मौजूदा आर्थिक पैकेज में बढ़ोतरी की गई है। हथियार जमा कराने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि, पुनर्वास भत्ता और आजीविका सहायता राशि में सरकार ने इजाफा किया है। इससे उग्रवादियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
पुनर्वास के तहत सरकार ऐसे व्यक्तियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जिससे वे रोजगार हासिल कर सकें। हस्तशिल्प, कृषि, पशुपालन, ड्राइविंग, बेकरी और छोटे उद्यमों में प्रशिक्षण देकर उन्हें आजीविका के नए अवसर दिए जाएंगे।
संशोधित नीति में आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षित आवास, कानूनी सहायता और पुलिस संरक्षण बेहतर करने का प्रावधान जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि आत्मसमर्पण के बाद इन व्यक्तियों को समाज में सहज रूप से समाहित करने के लिए यह कदम जरूरी था।
पिछले कुछ वर्षों में ओडिशा में माओवादी गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन अभी भी कुछ जिलों में उग्रवाद सक्रिय है। सरकार का मानना है कि बेहतर पुनर्वास सुविधाएँ माओवादियों को हिंसा छोड़कर विकास की राह अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी।राज्य सरकार ने उम्मीद जताई है कि नई नीति से आत्मसमर्पण की संख्या बढ़ेगी और उग्रवाद प्रभावित जिलों में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी।


