Stock Market: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के बाद हलचल, Nifty 23,200 पार हुआ तो खुल सकता है तेजी का रास्ता
भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह निवेशकों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा। लगातार बिकवाली के दबाव ने निफ्टी को साप्ताहिक आधार पर 2.36 फीसदी नीचे धकेल दिया। हालांकि, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिनों में बाजार ने संभलने की कोशिश की, लेकिन इस रिकवरी को अभी मजबूत तेजी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
अब बाजार की नजर अगले सप्ताह के कारोबार पर है। निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निफ्टी अपनी खोई हुई मजबूती वापस हासिल कर पाएगा या फिर एक बार फिर बिकवाली का दबाव बढ़ेगा? तकनीकी संकेत बताते हैं कि फिलहाल बाजार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां कुछ चुनिंदा स्तर आने वाली दिशा तय कर सकते हैं।
Nifty के लिए 23,000 का स्तर बना निर्णायक मोड़
निफ्टी की मौजूदा चाल को समझने के लिए 23,000 के स्तर पर नजर रखना जरूरी है। बाजार में हालिया रिकवरी के दौरान इस स्तर के ऊपर पहुंचना सकारात्मक संकेत रहा, लेकिन केवल इसके ऊपर कारोबार करना पर्याप्त नहीं होगा। इंडेक्स को यहां टिकाऊ मजबूती दिखानी होगी।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22,850 से 22,800 का दायरा प्रमुख सपोर्ट माना जा रहा है। यदि बिकवाली के कारण निफ्टी इस क्षेत्र से नीचे फिसलता है, तो 22,650 तक कमजोरी देखने को मिल सकती है।
इसके विपरीत 23,170 से 23,200 का क्षेत्र बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह स्तर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके आसपास 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज भी मौजूद है। इस रेंज के ऊपर मजबूत क्लोजिंग बाजार में खरीदारी का भरोसा बढ़ा सकती है। अगला संभावित तकनीकी स्तर 23,400 माना जा रहा है।
तेजी के संकेत हैं, लेकिन अभी पुष्टि जरूरी
बाजार के कुछ तकनीकी संकेतों में सुधार जरूर दिखाई दे रहा है। निफ्टी का RSI बढ़कर 53.50 पर पहुंचना बताता है कि हालिया गिरावट के बाद खरीदारी की ताकत में कुछ सुधार हुआ है।
आमतौर पर RSI का 50 से ऊपर रहना सकारात्मक गति का संकेत माना जाता है। लेकिन इसे अकेले तेजी की पुष्टि नहीं समझना चाहिए। इंडेक्स की कीमत, ट्रेडिंग वॉल्यूम और प्रमुख रेजिस्टेंस के ऊपर टिकाव भी देखना जरूरी है।
ऑप्शंस बाजार के आंकड़े भी इसी सावधानी की ओर इशारा करते हैं। 23,200 और 23,500 की स्ट्राइक पर कॉल ओपन इंटरेस्ट की अधिकता संभावित रुकावट का संकेत देती है। दूसरी ओर 22,500 से 22,800 के बीच पुट पोजिशन की मौजूदगी इस क्षेत्र में सपोर्ट की संभावना दिखाती है।
इसका अर्थ है कि बाजार फिलहाल एक सीमित दायरे में दिशा तलाश सकता है।
शुक्रवार की रिकवरी ने दिए मिले-जुले संकेत
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी ने इंट्राडे लो से लगभग 213 अंकों की रिकवरी की और बढ़त के साथ बंद होने में सफलता हासिल की।
आईटी, हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। ट्रेंट और इंडिगो जैसे शेयरों में मजबूती भी प्रमुख इंडेक्स के लिए मददगार रही।
हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का कमजोर प्रदर्शन चिंता का विषय बना रहा। निफ्टी 500 की कंपनियों में से केवल 108 शेयरों में तेजी दर्ज होना बताता है कि बाजार की रिकवरी व्यापक नहीं थी।
यही वह अंतर है जिसे निवेशकों को समझना चाहिए। प्रमुख इंडेक्स का ऊपर जाना और पूरे बाजार में खरीदारी लौटना दो अलग-अलग बातें हैं। जब कुछ चुनिंदा बड़े शेयर इंडेक्स को ऊपर ले जाते हैं, तब छोटे और मध्यम निवेशकों के पोर्टफोलियो में कमजोरी बनी रह सकती है।
Bank Nifty की कमजोरी क्यों बढ़ा सकती है चिंता?
बैंकिंग शेयरों की चाल बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि बैंक निफ्टी में बड़े वित्तीय संस्थानों का प्रदर्शन शामिल होता है।
फिलहाल बैंक निफ्टी में निफ्टी जैसी मजबूती नहीं दिख रही है। इसका RSI 47.66 के आसपास होना बताता है कि खरीदारी की गति अभी कमजोर बनी हुई है।
तकनीकी तौर पर 54,300 से 54,200 का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 54,000 से 53,800 तक दबाव देखने को मिल सकता है।
वहीं, 55,100 से 55,200 का दायरा प्रमुख रेजिस्टेंस है। इस क्षेत्र के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर 55,600 से 55,800 की दिशा में तेजी की संभावना बन सकती है।
बाजार की व्यापक मजबूती के लिए बैंकिंग शेयरों का साथ देना जरूरी होगा। केवल आईटी या कुछ चुनिंदा कंपनियों की तेजी से बाजार में टिकाऊ सुधार की पुष्टि नहीं होती।
अगले सप्ताह इन सेक्टरों पर रह सकती है निवेशकों की नजर
आने वाले सप्ताह में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन बाजार की दिशा समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आईटी और फार्मा: बाजार में अनिश्चितता के दौरान निवेशक अपेक्षाकृत मजबूत कारोबार और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन वाली कंपनियों पर ध्यान दे सकते हैं।
बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज: इन शेयरों की चाल बाजार में जोखिम लेने की क्षमता का संकेत दे सकती है। बैंक निफ्टी में सुधार व्यापक बाजार की रिकवरी को मजबूती दे सकता है।
ऑटोमोबाइल: दोपहिया और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग इस सेक्टर के लिए सकारात्मक पहलू है। हालांकि, पैसेंजर व्हीकल कंपनियों को ऊंचे पिछले साल के बिक्री आंकड़ों और डीलर इन्वेंट्री की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स: सरकारी खर्च, परियोजनाओं की प्रगति और कंपनियों के ऑर्डर बुक इन सेक्टरों की आगे की चाल के महत्वपूर्ण आधार रहेंगे।
कच्चे तेल की कीमतें बन सकती हैं बाजार की सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय शेयर बाजार के लिए घरेलू परिस्थितियों के साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताओं के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
कच्चा तेल महंगा होने का असर भारत पर कई स्तरों पर पड़ सकता है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, कंपनियों की उत्पादन लागत प्रभावित हो सकती है और महंगाई पर दबाव बन सकता है।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार में उपलब्ध नकदी और निवेशकों के भरोसे पर असर डाल सकती है।
इंडिया विक्स का लगभग 15.6 तक पहुंचना भी बताता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे जरूरी रणनीति?
मौजूदा परिस्थितियों में जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेना जोखिम भरा हो सकता है। बाजार की दिशा स्पष्ट होने तक कंपनियों के वित्तीय नतीजों, कर्ज की स्थिति, कारोबार की गुणवत्ता और वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी है।
खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में केवल हालिया गिरावट देखकर खरीदारी करना उचित नहीं होगा। कमजोर बाजार में अच्छे शेयर भी नीचे आ सकते हैं, लेकिन हर गिरावट निवेश का अवसर हो, यह जरूरी नहीं है।
लंबी अवधि के निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। वहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस के स्तरों के साथ स्टॉप लॉस का पालन करना महत्वपूर्ण रहेगा।
अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करेंगे ये अहम स्तर
आने वाले सप्ताह में निफ्टी के लिए 22,800 का सपोर्ट और 23,200 का रेजिस्टेंस सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत बने रहेंगे। इन दोनों स्तरों के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
यदि निफ्टी 23,200 के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो 23,400 की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है। वहीं, 22,800 के नीचे कमजोरी आने पर 22,650 का स्तर महत्वपूर्ण हो जाएगा।
कुल मिलाकर, बाजार में रिकवरी की शुरुआत के संकेत जरूर हैं, लेकिन मजबूत तेजी की पुष्टि अभी बाकी है। अगले सप्ताह निवेशकों के लिए सबसे अहम बात केवल निफ्टी की बढ़त नहीं, बल्कि यह देखना होगा कि क्या इस तेजी में बैंकिंग, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी भागीदारी करते हैं। यही बाजार की वास्तविक मजबूती का बेहतर संकेत होगा।




