नई दिल्ली, 30 नवंबर 2025 — इस वर्ष मोक्षदा एकादशी 2025 अत्यंत शुभ संयोग में मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी पर व्रत करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
तिथि: 2025 में यह पावन एकादशी दिसंबर माह में मनाई जाएगी।पूजन मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त और प्रातः काल पूजा का सर्वोत्तम समय माना गया है।पारण (व्रत खोलने का समय): अगले दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में पारण किया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से कर्म बंधन टूटते हैं और व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग मिलता है।पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस एकादशी पर व्रत और पूजा करने से पूर्वजों को भी मोक्ष प्राप्त होता है।यह एकादशी जीवन में शांति, सकारात्मकता और आत्मिक उन्नति का कारण बनती है।
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।घर में मानस शुद्धि के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ।तुलसी पत्ते, धूप, दीप, पुष्प और पंचामृत से विधिवत पूजा करें।विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।दिनभर निर्जला या फलाहार का व्रत रखें (शक्ति अनुसार)।शाम को पुनः आरती कर भगवान को नैवेद्य अर्पित करें। रात को विष्णु भगवान के भजन या कथा का श्रवण करें।
व्रत का पारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सही तरीके से पारण करने से ही व्रत पूर्ण होता है।पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में करें। सबसे पहले भगवान विष्णु को तुलसी मिश्रित जल अर्पित करें। फिर हल्का सात्त्विक भोजन ग्रहण करें — जैसे मूंग दाल खिचड़ी, फल, या दूध। पारण से पहले किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। अनाज दान, वस्त्र दान या फल-फूल का दान भी पुण्यकर होता है।
मोक्ष की राह आसान होती है , जीवन के कष्ट कम होते हैं , पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति , मन और आत्मा को शुद्धता ,सभी प्रकार के पापों से मुक्ति |





