LPG Price: महंगाई का बड़ा दबाव, दिसंबर में तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी ₹370 तक पहुंचने का अनुमान
घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की कीमतों को लेकर दिसंबर 2026 से पहले एक अहम संकेत सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर घरेलू सिलेंडर की बिक्री से होने वाला वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के वित्त निदेशक अनुज जैन के अनुमान के मुताबिक, दिसंबर में 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी बढ़कर करीब 370 रुपये तक पहुंच सकती है।
इसका सीधा असर फिलहाल कंपनियों के हिसाब-किताब पर दिखाई दे रहा है, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए इसका अर्थ यह नहीं है कि सिलेंडर की कीमत दिसंबर में निश्चित रूप से 370 रुपये बढ़ जाएगी। खुदरा कीमतों में बदलाव का फैसला अलग प्रक्रिया और सरकारी नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करता है।
लागत और बिक्री मूल्य के बीच बढ़ती खाई
तेल कंपनियां घरेलू एलपीजी सिलेंडर को जिस कीमत पर बेचती हैं, अंतरराष्ट्रीय बाजार से गैस खरीदने, उसे भारत तक लाने, बॉटलिंग और वितरण करने की कुल लागत उससे अधिक हो सकती है। इस अंतर को अंडर-रिकवरी कहा जाता है।
IOCL के वित्त निदेशक के अनुसार, घरेलू सिलेंडर पर यह अंतर सितंबर 2026 में करीब 184 रुपये था। अक्टूबर में बढ़कर 229 रुपये हुआ और नवंबर के लिए लगभग 309 रुपये का अनुमान जताया गया है। दिसंबर में इसके 370 रुपये तक पहुंचने की आशंका है। इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) का बढ़कर 756 डॉलर प्रति टन होना प्रमुख कारण बताया गया है।
यानी वैश्विक बाजार में एलपीजी महंगी होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ती, तो लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर तेल कंपनियों को वहन करना पड़ता है।
आम उपभोक्ता के लिए इसका क्या मतलब है?
घरेलू गैस की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की लागत से तय नहीं होती। इसमें सरकारी नीति, सब्सिडी, कंपनियों की लागत और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।
यदि वैश्विक कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियों के सामने यह संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है कि घरेलू रसोई का खर्च अचानक न बढ़े और कंपनियों पर जमा हो रहा वित्तीय दबाव भी नियंत्रित रहे।
इसलिए उपभोक्ताओं को दो बातों में अंतर समझना जरूरी है—कंपनियों की अंडर-रिकवरी बढ़ना और घरेलू सिलेंडर की खुदरा कीमत बढ़ना एक ही बात नहीं है। फिलहाल सामने आया 370 रुपये का आंकड़ा लागत और बिक्री मूल्य के बीच संभावित अंतर का अनुमान है, घोषित मूल्यवृद्धि नहीं।
BPCL और HPCL पर भी दबाव
यह चुनौती केवल इंडियन ऑयल तक सीमित नहीं है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) के आंकड़े भी घरेलू एलपीजी कारोबार पर बढ़ते दबाव की ओर संकेत करते हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक BPCL की घरेलू एलपीजी अंडर-रिकवरी लगभग 17,334.40 करोड़ रुपये और HPCL की करीब 18,048.82 करोड़ रुपये दर्ज की गई। IOCL की इसी अवधि की अंडर-रिकवरी 32,505.69 करोड़ रुपये बताई गई है। ये कंपनियों के स्तर पर जमा वित्तीय अंतर के आंकड़े हैं, इन्हें किसी एक महीने का नुकसान नहीं समझना चाहिए।
जब बिक्री से मिलने वाली रकम लागत को पूरा नहीं कर पाती, तो कंपनियों को अपने दूसरे कारोबार से मिलने वाले मुनाफे का सहारा लेना पड़ सकता है। इसे क्रॉस-सब्सिडाइजेशन कहा जाता है। इसके तहत कमर्शियल एलपीजी, विमान ईंधन या रिफाइनिंग जैसे क्षेत्रों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल घरेलू एलपीजी कारोबार के दबाव को संभालने में किया जा सकता है।
सरकारी मुआवजे की भूमिका अहम
घरेलू एलपीजी की कीमतों को उपभोक्ताओं के लिए नियंत्रित रखने की नीति में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि कंपनियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई समय पर नहीं मिलती, तो उनके वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर निवेश, नकदी प्रवाह और दूसरे व्यावसायिक फैसलों पर भी पड़ सकता है।
दूसरी ओर, यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का पूरा बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाए, तो घरेलू बजट पर असर पड़ेगा। खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए रसोई गैस का खर्च महत्वपूर्ण है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों सहित करोड़ों परिवारों के लिए कीमत और सब्सिडी का संतुलन इसलिए भी मायने रखता है।
दिसंबर में किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले समय में घरेलू गैस की कीमतों को समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बेंचमार्क, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत और सरकारी मुआवजे से जुड़े फैसले अहम होंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आती है, तो कंपनियों पर दबाव घट सकता है। लेकिन कीमतें ऊंची बनी रहीं और मुआवजे में देरी हुई, तो अंडर-रिकवरी का बोझ आगे भी चर्चा का विषय रहेगा।
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि दिसंबर में 370 रुपये की संभावित अंडर-रिकवरी को सिलेंडर की तय मूल्यवृद्धि न मानें। घरेलू गैस के नए दाम तभी स्पष्ट होंगे, जब तेल कंपनियां आधिकारिक तौर पर संशोधित खुदरा कीमतों की घोषणा करेंगी।




