DMF Scam: छत्तीसगढ़ में बड़ा खुलासा, ₹31.70 करोड़ की संपत्ति जब्त; 17 लोगों पर ED का शिकंजा
छत्तीसगढ़ में खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल विकास कार्यों और स्थानीय लोगों की सुविधाओं के लिए किया जाता है। लेकिन इसी उद्देश्य से बनाए गए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के कथित दुरुपयोग का मामला अब जांच के एक नए और अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में 31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं। साथ ही 17 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
यह कार्रवाई केवल आर्थिक अनियमितताओं की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं, जिसके तहत खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
17 लोगों के खिलाफ ED की कार्रवाई, 31.70 करोड़ की संपत्ति जब्त
प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 29 अक्टूबर को 31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी किया। इसके अगले दिन यानी 30 अक्टूबर को रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई।
इस शिकायत में सतपाल सिंह छाबड़ा, मनदीप चावला समेत कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। ED की कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों और धन के लेन-देन की जांच को आगे बढ़ाना है। हालांकि, संपत्तियों की अस्थायी जब्ती को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
क्या है DMF फंड और इसके दुरुपयोग का मामला?
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन यानी DMF की स्थापना खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा और विकास के लिए की गई है। खनन गतिविधियों से प्रभावित गांवों में पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़क, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए इस फंड का उपयोग किया जाता है।
छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य में DMF की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों के खनन से प्रभावित इलाकों में इस फंड के माध्यम से विकास कार्यों को गति देने की अपेक्षा रहती है।
ऐसे में यदि इस राशि के आवंटन, ठेकों या भुगतान की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं होती हैं, तो उसका असर सीधे उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनके जीवन और आजीविका पर खनन गतिविधियों का प्रभाव पड़ता है।
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि सरकारी विकास राशि का वास्तविक उपयोग किन कामों में हुआ और कहीं उसका इस्तेमाल निजी आर्थिक लाभ के लिए तो नहीं किया गया।
पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़ी जांच
ED के मुताबिक, यह कथित घोटाला राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था, जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे। इस मामले में धनशोधन की जांच रायपुर में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई।
बाद में कांकेर जिले में छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज एक अन्य FIR को भी जांच में शामिल किया गया। इससे स्पष्ट है कि जांच का दायरा केवल एक शिकायत या एक जिले तक सीमित नहीं रहा है।
हालांकि, किसी सरकार के कार्यकाल में कथित अनियमितता होने मात्र से किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं होती। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और न्यायालय में साबित होने वाले तथ्यों का महत्व होगा।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
DMF फंड का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं पर पैसा खर्च करना नहीं है। इसका वास्तविक मकसद उन समुदायों को विकास का लाभ पहुंचाना है, जो खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं।
इसलिए इस फंड से जुड़े कथित घोटाले का प्रभाव कई स्तरों पर देखा जाना चाहिए।
पहला, स्थानीय विकास पर असर: यदि विकास के लिए निर्धारित राशि का सही इस्तेमाल नहीं होता, तो प्रभावित गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार बाधित हो सकता है।
दूसरा, सरकारी खर्च की पारदर्शिता: इस तरह के मामलों से सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और परियोजनाओं की निगरानी को अधिक जवाबदेह बनाने की जरूरत सामने आती है।
तीसरा, जनता का भरोसा: खनिज संपदा से मिलने वाली राशि का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। जांच में गड़बड़ी साबित होने पर जवाबदेही तय करना और प्रभावित क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
आगे क्या हो सकता है?
31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों की अस्थायी जब्ती और 17 लोगों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी को आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे और आरोपियों को भी अपना पक्ष रखने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
आने वाले समय में इस मामले की दिशा अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
इसके साथ ही DMF से संचालित परियोजनाओं के खर्च और उनके वास्तविक परिणामों की निगरानी भी जरूरी है। केवल कार्रवाई से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि भविष्य में खनन प्रभावित परिवारों के नाम पर आवंटित धन वास्तव में उन्हीं के विकास पर खर्च हो।




