नई दिल्ली : सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने कुछ दिन पहले नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इस डिवाइस की कीमत करीब 1.34 लाख रुपये रखी गई है। इसके बाद एक बार फिर भारत में सैटेलाइट फोन के यूज और इससे जुड़े नियम चर्चा में आ गए हैं। जी हां, क्योंकि देश में सैटेलाइट फोन पूरी तरह बैन नहीं हैं, लेकिन इन्हें खरीदने और यूज करने के लिए सख्त सरकारी नियमों को फॉलो करना जरूरी है। बीएसएनएल ने जनवरी 2018 में आम नागरिकों के लिए Global Satellite Phone Service (GSPS) की शुरुआत की थी।
यह सर्विस Inmarsat सैटेलाइट नेटवर्क पर बेस्ड है। नॉर्मल मोबाइल फोन जहां कॉल और इंटरनेट के लिए मोबाइल टावर्स पर डिपेंड रहते हैं, वहीं सैटेलाइट फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि ये दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों, जंगलों, रेगिस्तानों, समुद्र और प्राकृतिक आपदा वाले एरिया में भी सही से काम करते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क खराब है या उपलब्ध नहीं है। हालांकि इन फोन्स का बिना परमिशन यूज करना भारी पड़ सकता है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं…
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भारत में किन सैटेलाइट सर्विस की परमिशन?
फिलहाल भारत में बीएसएनएल के जरिए Inmarsat नेटवर्क बेस्ड सैटेलाइट सर्विस को निर्धारित शर्तों के साथ मंजूरी मिली हुई है। वहीं, Thuraya, Iridium और कुछ अन्य विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क भारत में ऑथराइज्ड नहीं हैं। ऐसे नेटवर्क पर चलने वाले सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल बिना सरकारी मंजूरी के नहीं किया जा सकता।
सैटेलाइट फोन के लिए क्यों हैं इतने सख्त नियम?
भारत में सैटेलाइट फोन पर सख्ती की सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय सुरक्षा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सैटेलाइट फोन टावर्स के बजाय सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाते हैं, इसलिए इनकी निगरानी ट्रेडिशनल टेलीकॉम नेटवर्क की तरह करना आसान नहीं है। 2008 के मुंबई टेररिस्ट अटैक में आतंकियों द्वारा Thuraya सैटेलाइट फोन के यूज किया गया था जिसके बाद सरकार ने इन नियमों को और कड़ा कर दिया।






