Korba Rain Alert: भारी बारिश से किसानों पर टूटा संकट, खेतों में गिरी धान की फसल; मुआवजे की मांग तेज
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बदले मौसम ने धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कटाई के लिए तैयार खड़ी फसल पर बारिश और तेज हवाओं की मार पड़ने से कई इलाकों में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है, क्योंकि जिस फसल को तैयार करने में महीनों की मेहनत और पूंजी लगी, अब उसकी सुरक्षित कटाई मौसम पर निर्भर हो गई है।
पिछले 24 घंटे में जिले में औसतन 20.02 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ गई है और कई स्थानों पर पकी हुई धान की फसल जमीन पर गिर गई है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो किसानों को उत्पादन और गुणवत्ता दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
तैयार धान की फसल पर मौसम की मार
बुधवार से मौसम में बदलाव शुरू हुआ था। शुरुआत में हल्की बारिश हुई, लेकिन गुरुवार को तेज हवाओं के साथ अच्छी बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह भी आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही।
इस समय धान की फसल कटाई के महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में बारिश का समय किसानों के लिए चुनौती बन गया है। खेतों में गिरी फसल को काटना और सुखाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक कठिन हो जाता है। गीली बालियों को लंबे समय तक खेत में छोड़ने से अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
फसल गिरने के बाद बढ़ता है अंकुरण का खतरा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खड़ी फसल की तुलना में जमीन पर गिरी हुई पकी धान की फसल को लगातार नमी से अधिक खतरा रहता है। बालियां पानी के संपर्क में रहने पर उनमें अंकुरण शुरू हो सकता है। इससे धान की गुणवत्ता और बाजार में उसकी स्वीकार्यता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसके अलावा गीली फसल की कटाई, मड़ाई और भंडारण में भी परेशानी आती है। किसानों को अतिरिक्त मजदूरी, सुखाने और परिवहन पर खर्च करना पड़ सकता है। यानी नुकसान केवल खेत में गिरी फसल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कटाई के बाद की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
करतला में सबसे ज्यादा बारिश, कई तहसीलों में भी असर
जिले में बारिश का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करतला तहसील में सर्वाधिक 31.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। धीसमा में 30 मिलीमीटर और कटघोरा में 30.2 मिलीमीटर वर्षा हुई।
अन्य क्षेत्रों में दर्ज बारिश इस प्रकार रही:
- कोरबा: 9.5 मिमी
- धीसमा: 30.0 मिमी
- अजगरबहार: 18.0 मिमी
- करतला: 31.5 मिमी
- बरपाली: 10.0 मिमी
- कटघोरा: 30.2 मिमी
- दीपका: 14.9 मिमी
- दर्री: 20.2 मिमी
- पाली: 20.2 मिमी
- हरदीबाजार: 14.6 मिमी
- पोड़ी उपरोड़ा: 20.0 मिमी
- पसान: 23.0 मिमी
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के कई कृषि क्षेत्रों में बारिश का असर एक समान नहीं रहा। स्थानीय स्तर पर नुकसान का वास्तविक आकलन करना इसलिए जरूरी है, ताकि प्रभावित किसानों की पहचान सही तरीके से हो सके।
बांगो बांध का जलस्तर भी बढ़ा
बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। जिले के महत्वपूर्ण जलस्रोत बांगो बांध का जलस्तर बढ़कर 355.80 मीटर दर्ज किया गया है। बांध में जलभराव 77.89 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
बांध में बढ़ता जलस्तर जल संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन लगातार बारिश की स्थिति में जल प्रबंधन और निगरानी भी जरूरी हो जाती है।
किसानों ने प्रशासन से मांगा फसल नुकसान का सर्वे
नकटीखार के किसान अजीत दास महंत ने बताया कि उन्होंने कई एकड़ में धान की खेती की है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण खेती प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि बारिश जारी रही, तो तैयार फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है।
दादर के किसान अरुण यादव के खेतों में भी अच्छी हुई धान की फसल बारिश के कारण गिर गई है। उन्होंने बताया कि खेतों के साथ बाड़ी में लगाई गई सब्जियों में भी पानी भरने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव-गांव में फसल क्षति का सर्वे कराया जाए और वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जाए।
अब प्रशासनिक सर्वे और मौसम की स्थिति होगी निर्णायक
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि किसानों को नुकसान से राहत कितनी जल्दी मिलती है। फसल गिरने के बाद समय पर कटाई और उचित सुखाने की व्यवस्था नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकती है। वहीं, जिन खेतों में पानी जमा है, वहां जल निकासी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
प्रशासन और कृषि विभाग के लिए जरूरी है कि प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर फसल की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करें। किसानों को फसल नुकसान के आकलन, जरूरी दस्तावेजों और उपलब्ध सहायता योजनाओं की जानकारी भी समय पर मिलनी चाहिए।
कोरबा में धान की फसल इस समय किसानों की सालभर की मेहनत का परिणाम है। ऐसे में मौसम की मार के बीच राहत केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि निष्पक्ष सर्वे, समयबद्ध कार्रवाई और उचित मुआवजे से मिलेगी।




