देश में गर्मी की फसलों के कुल रकबे में इस बार गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन दलहन और तिलहन की बुवाई में बढ़ोतरी ने कृषि क्षेत्र को आंशिक राहत दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार कुल बोआई क्षेत्र में कमी आई है, जबकि किसानों ने दालों और तिलहनों की खेती की ओर ज्यादा रुख किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार में बेहतर दाम की उम्मीद ने किसानों को फसल पैटर्न बदलने के लिए प्रेरित किया है।
आंकड़ों के मुताबिक बाजरा की बुवाई 0.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। इसके अलावा मूंग, उड़द और अन्य दलहनी फसलों के रकबे में भी इजाफा देखा गया है। तिलहन फसलों में सोयाबीन और सूरजमुखी की बुवाई बढ़ने से उत्पादन संभावनाएं बेहतर मानी जा रही हैं। हालांकि, मौसम की अनिश्चितता और जल उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है तो दलहन और तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी से आयात निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं, कुल रकबा घटने के कारण कुछ पारंपरिक फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।


