कठुआ में CISF कैंप की भयावह घटना: 4 जवानों की मौत, आपसी फायरिंग ने बढ़ाई चिंता
जम्मू-कश्मीर: कठुआ जिले के बसोहली इलाके में मंगलवार को CISF कैंप में हुई गोलीबारी ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक गंभीर पहलू को सामने ला दिया। Sewa Hydel Power Project से जुड़े कैंप में हुई इस घटना में चार CISF कर्मियों की मौत हो गई। मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और दो कांस्टेबल शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक घटना को फिलहाल बल के भीतर हुई फायरिंग के रूप में देखा जा रहा है और इसके पीछे की वास्तविक वजह जांच के बाद स्पष्ट होगी।
पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे जवान
घटना बसोहली के माशका क्षेत्र में स्थित Sewa Hydel Project के परिसर से जुड़े CISF कैंप में हुई। जिला कठुआ की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार Sewa Hydel Project बसोहली तहसील में Sewa नदी पर स्थित महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है।
ऐसे संवेदनशील और अपेक्षाकृत दूरस्थ प्रतिष्ठानों पर तैनात सुरक्षा बलों की भूमिका केवल परिसर की सुरक्षा तक सीमित नहीं होती। हथियारों से लैस कर्मियों के बीच अनुशासन, कमांड व्यवस्था और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति को नियंत्रित करने की क्षमता भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होती है।
चार जवानों की जान गई, जांच में सामने आएगा पूरा घटनाक्रम
ताजा जानकारी के अनुसार गोलीबारी में चार जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल संजीव कुमार और कांस्टेबल मोहम्मद रफीक के रूप में की गई है। घटना के बाद पुलिस और CISF की ओर से जांच शुरू की गई है।
शुरुआती रिपोर्टों में जवानों के बीच विवाद के बाद फायरिंग की बात सामने आई है, लेकिन विवाद किस मुद्दे पर हुआ, गोलीबारी की शुरुआत कैसे हुई और घटना के दौरान कैंप में कौन-कौन मौजूद था—इन सवालों के जवाब जांच से ही स्पष्ट होंगे। आरोपी जवान को हिरासत में लिए जाने की भी रिपोर्ट है।
घटना का सबसे गंभीर पहलू क्या है?
किसी सुरक्षा बल के कैंप में हथियारों का इस्तेमाल यदि साथी जवानों के खिलाफ हो जाए, तो इसका असर केवल तत्काल जानमाल के नुकसान तक सीमित नहीं रहता। ऐसी घटना में हथियारों की सुरक्षित निगरानी, कैंप की आंतरिक व्यवस्था, तनावपूर्ण परिस्थितियों में कमांड रिस्पॉन्स और जवानों के बीच विवाद को समय रहते नियंत्रित करने जैसे पहलुओं की भी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि किसी एक घटना के आधार पर पूरे बल की व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस मामले में जांच एजेंसियों को यह देखना होगा कि क्या फायरिंग अचानक हुई या उससे पहले कोई ऐसी स्थिति बनी थी, जिसे समय रहते पहचाना जा सकता था।
बाहरी हमले से अलग है मामला
कठुआ की इस घटना को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में इसे किसी बाहरी आतंकी हमले के बजाय CISF कर्मियों के बीच हुई फायरिंग बताया गया है। यही कारण है कि जांच का केंद्र अब कैंप के भीतर की परिस्थितियों और घटना से पहले की गतिविधियों पर रहेगा।
माशका क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी जांच में व्यावहारिक चुनौती पैदा कर सकती है। Sewa Project कठुआ जिले के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है और परियोजना क्षेत्र की स्थिति ऐसी है कि घटनास्थल तक पहुंच और तत्काल कार्रवाई का पूरा क्रम भी जांच का हिस्सा बन सकता है।
आगे जांच से किन सवालों के जवाब मिलेंगे?
अब जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि गोलीबारी की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई, हथियार तक पहुंच कैसे हुई, घटना से पहले जवानों के बीच क्या हुआ और कैंप में मौजूद अधिकारियों ने किस तरह प्रतिक्रिया दी।
इसके साथ CISF की आंतरिक जांच यह भी देख सकती है कि कैंप में हथियार प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किस तरह हो रहा था। घटना के बाद संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर तैनात जवानों के लिए आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और आपात प्रतिक्रिया की समीक्षा भी महत्वपूर्ण हो सकती है।



