Kanker Ganja Smuggling: बड़ा खुलासा! 6 फर्जी नंबर प्लेट के सहारे चल रहा था करोड़ों का नशा कारोबार, UP से आरोपी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के कांकेर में सामने आए गांजा तस्करी के मामले ने अंतरराज्यीय नशे के कारोबार के एक ऐसे तरीके को उजागर किया है, जिसमें तस्करी के लिए महंगी SUV और फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, ओडिशा से गांजा लेकर हरियाणा जाने की तैयारी कर रहे एक आरोपी ने अपनी फॉर्च्यूनर कार में छह अलग-अलग फर्जी नंबर प्लेट रखी थीं, ताकि रास्ते में पहचान बदलकर पुलिस की जांच से बच सके।
इस मामले में पुलिस ने 447.720 किलोग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ 23 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। फरार कार चालक को 300 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। जब्त वाहन, मोबाइल और अन्य सामान सहित कुल जब्ती की कीमत लगभग 2 करोड़ 48 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई है।
नाकेबंदी तोड़कर भागा चालक, जंगल के पास मिले गांजे के पैकेट
पुलिस के अनुसार, 4 नवंबर को सूचना मिली थी कि ओडिशा से केशकाल मार्ग के रास्ते एक फॉर्च्यूनर में गांजा लाया जा रहा है। इसके बाद गढ़पिछवाड़ी चौक बायपास रोड पर पुलिस ने घेराबंदी की।
कुछ समय बाद संदिग्ध वाहन वहां पहुंचा, लेकिन पुलिस को देखकर चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय तेज रफ्तार से नाकेबंदी तोड़ दी। इसके बाद पुलिस ने माकड़ी पुलिया और ज्ञानी चौक सहित अन्य स्थानों पर भी रास्ते बंद कर तलाश शुरू की।
इसी दौरान आरोपी ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए कथित तौर पर गांजे के पैकेट सुनसान इलाके में फेंक दिए और फरार हो गया। बाद में ग्राम सिंगारभाट के राइस मिलपारा में शिव मंदिर के पास जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में भूरे टेप से लिपटे पैकेट मिले।
पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में पैकेटों की गिनती और वजन कराया। कुल 90 पैकेट में 447.720 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
एक फॉर्च्यूनर, छह फर्जी नंबर प्लेट: पहचान छिपाने का तरीका आया सामने
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आरोपी की कथित कार्यप्रणाली है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपनी गाड़ी में ओडिशा, महाराष्ट्र और हरियाणा के छह अलग-अलग फर्जी नंबर प्लेट रखता था।
आरोप है कि वह रास्ते में चेकिंग और निगरानी से बचने के लिए जरूरत के अनुसार नंबर प्लेट बदलता था। इस तरीके का उद्देश्य वाहन की पहचान को लेकर भ्रम पैदा करना और पुलिस की नजर से बचना बताया जा रहा है।
महंगी SUV का इस्तेमाल भी इस मामले में ध्यान खींचता है। आमतौर पर ऐसी गाड़ियों की पहचान और आवाजाही पर निगरानी रखना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, केवल वाहन या नंबर प्लेट बदलने से डिजिटल निगरानी से बचना आसान नहीं है। यही बात इस मामले की आगे की जांच में अहम साबित हो सकती है।
300 से ज्यादा CCTV कैमरों ने खोला फरारी का रास्ता
नाकेबंदी के दौरान आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी लोकेशन का पता लगाना थी। पुलिस के अनुसार, चालक लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और मोबाइल फोन भी बंद कर देता था।
इसके बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम ने जांच का दायरा बढ़ाया। टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप, प्रमुख चौराहों और दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे 300 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की गई।
लगातार तकनीकी निगरानी और सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि अब अंतरराज्यीय अपराधों की जांच केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रहती। अलग-अलग शहरों और राज्यों के कैमरों से मिलने वाली फुटेज को जोड़कर संदिग्ध की आवाजाही का पता लगाया जा सकता है।
हरियाणा का रहने वाला है आरोपी, ओडिशा से सप्लाई की थी तैयारी
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुखपाल उर्फ सुक्खा (30 वर्ष), निवासी स्वामी नगर वार्ड-8, पुराना वाटर वर्क्स के पास, जिला फतेहाबाद, हरियाणा के रूप में हुई है।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह ओडिशा से कम कीमत पर गांजा खरीदकर हरियाणा और आसपास के राज्यों में अधिक कीमत पर बेचने की तैयारी में था।
पुलिस ने उसे 7 नवंबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए अदालत में पेश किया। मामले में NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
जब्ती में क्या-क्या मिला?
पुलिस की कार्रवाई में बरामद सामान का विवरण इस प्रकार है:
- गांजा: 447.720 किलोग्राम, अनुमानित कीमत 2 करोड़ 23 लाख 50 हजार रुपये।
- फॉर्च्यूनर कार: अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये।
- मोबाइल फोन: करीब 10 हजार रुपये।
- फर्जी नंबर प्लेट: कुल 6।
पुलिस के अनुसार, कुल जब्त संपत्ति की कीमत लगभग 2 करोड़ 48 लाख 60 हजार रुपये है।
अब जांच का अगला महत्वपूर्ण सवाल क्या है?
इस कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में गांजे की बरामदगी जरूर हुई है, लेकिन जांच का दायरा इससे आगे जाना जरूरी है। सबसे अहम सवाल यह है कि ओडिशा में गांजे की आपूर्ति किसने की थी और हरियाणा में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
इसके अलावा यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी अकेले इस नेटवर्क में काम कर रहा था या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। छह फर्जी नंबर प्लेट कहां तैयार कराई गईं, वाहन के इस्तेमाल और खरीद से जुड़े दस्तावेज क्या बताते हैं और क्या पहले भी इसी तरीके से तस्करी की गई थी—इन बिंदुओं की जांच नेटवर्क की वास्तविक पहुंच सामने ला सकती है।
निष्कर्ष: कांकेर की यह कार्रवाई केवल 447 किलो गांजा पकड़ने तक सीमित नहीं है। यह अंतरराज्यीय नशा तस्करी के संभावित नेटवर्क, पहचान छिपाने के तरीकों और तकनीकी निगरानी की भूमिका को भी सामने लाती है। अब पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि कथित सप्लाई चेन और उसके पीछे जुड़े लोगों तक पहुंचना भी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।




