Kanker Crime: शर्मनाक खुलासा! झाड़-फूंक के नाम पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, 5 महीने की गर्भवती मिली बच्ची
Kanker Crime: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में इलाज और झाड़-फूंक के नाम पर एक 14 वर्षीय बच्ची के कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों की शिकायत के अनुसार, बच्ची को बच्चेदानी में परेशानी होने की बात कहकर एक स्थानीय बैगा के पास ले जाया गया था। बाद में उसकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में जांच हुई, जहां उसके करीब पांच महीने की गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने आरोपी रमेश कुमार पिस्दा (44) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
Kanker News: अस्पताल की जांच से सामने आया गंभीर मामला
यह मामला ताड़ोकी थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, बच्ची के पिता ने 18 अक्टूबर 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 15 अप्रैल को बच्ची की तबीयत खराब होने के बाद उसे आमागांव निवासी रमेश कुमार पिस्दा के पास ले जाया गया था, जो स्थानीय स्तर पर वैद्यराज या बैगा के रूप में जाना जाता था।
आरोप है कि बच्ची की जांच करने के बहाने उसने परिजनों को बच्चेदानी में समस्या होने की बात कही और एक ताबीज दिया। परिवार ने उसकी बात पर भरोसा किया और आगे भी इलाज के लिए बच्ची को उसके पास ले जाया गया।
17 अक्टूबर को बच्ची की तबीयत दोबारा बिगड़ने पर परिजन उसे अंतागढ़ अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकीय जांच में करीब पांच महीने की गर्भावस्था का पता चला। इसके बाद परिवार को मामले की गंभीरता का एहसास हुआ और बच्ची से बातचीत के दौरान कथित यौन शोषण की जानकारी सामने आई।
परिजनों को अलग भेजने का आरोप, जांच के घेरे में आरोपी
शिकायत के अनुसार, 25 मई को बच्ची को उसके चाचा के साथ दोबारा आरोपी के घर भेजा गया था। आरोप है कि वहां आरोपी बच्ची को पूजा वाले कमरे में ले गया और उसके चाचा को दूसरी जगह भेज दिया।
परिवार की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बच्ची को कथित तौर पर नशीली दवा देकर बेहोश किया जाता था और इसी दौरान उसके साथ यौन शोषण किया गया। इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्ची इलाज के लिए एक ऐसे व्यक्ति के पास पहुंची थी, जिस पर परिवार ने भरोसा किया था। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भरोसे का गंभीर दुरुपयोग होगा।
अंधविश्वास और इलाज के नाम पर धोखाधड़ी से बच्चों को कैसे बचाएं?
ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में बीमारी के समय परिवार कई बार पारंपरिक उपचार या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वैद्य की मदद लेते हैं। सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन किसी भी व्यक्ति को इलाज के नाम पर बच्चे को अकेले ले जाने, अनुचित तरीके से छूने, दवा देकर बेहोश करने या परिजनों से अलग रखने का अधिकार नहीं है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ सावधानियां महत्वपूर्ण हैं:
- बच्ची या बच्चे की बीमारी होने पर योग्य चिकित्सक से जांच कराएं।
- किसी भी व्यक्ति को बच्चे के साथ बंद कमरे में अकेले रहने की अनुमति देने से बचें, विशेषकर जब वह अनावश्यक गोपनीयता पर जोर दे।
- यदि कोई व्यक्ति बीमारी के नाम पर डराए, संदिग्ध दवा दे या परिवार को दूर भेजे, तो उसकी गतिविधियों पर सवाल उठाएं।
- बच्चे के व्यवहार, स्वास्थ्य या भावनात्मक स्थिति में असामान्य बदलाव दिखे, तो संवेदनशीलता से बात करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें।
- यौन शोषण का संदेह होने पर बच्चे को दोष न दें और पुलिस या बाल संरक्षण सेवाओं से संपर्क करें।
बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, स्थानीय प्रशासन और समाज की भी है।
POCSO Act: नाबालिग के खिलाफ यौन अपराध में सख्त कानूनी प्रावधान
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1), 64(2)(m), 65(1) और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 4 और 6 के तहत मामला दर्ज किया है।
पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। इसमें बच्चों के खिलाफ गंभीर यौन अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। मामले में कौन-से आरोप अंततः साबित होते हैं और क्या दंड लागू होगा, यह जांच, साक्ष्यों और न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को 19 अक्टूबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। गिरफ्तारी और मामला दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
पांच महीने की गर्भावस्था, बच्ची के स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता
14 वर्ष की उम्र में गर्भावस्था सामने आना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील स्थिति है। ऐसी परिस्थिति में किशोरी को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल, पोषण संबंधी सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
यदि किसी बच्चे के साथ यौन हिंसा हुई है, तो उसका असर शारीरिक चोटों तक सीमित नहीं रहता। भय, असुरक्षा, तनाव और भरोसे से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसलिए चिकित्सकीय उपचार के साथ संवेदनशील परामर्श और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है।
बच्ची की पहचान और निजता की रक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाचार रिपोर्टिंग में उसका नाम, तस्वीर, पता या ऐसे विवरण प्रकाशित नहीं किए जाने चाहिए, जिनसे उसकी पहचान उजागर हो सकती है।




