IIT दिल्ली से ISRO तक और फिर IPS: जया शर्मा की कहानी
हिसार/हरियाणा: सिविल सेवा की तैयारी को अक्सर एक लंबी और सीधी दौड़ के तौर पर देखा जाता है, लेकिन जया शर्मा का सफर बताता है कि करियर की राह कई मोड़ों से होकर भी लक्ष्य तक पहुंच सकती है। हरियाणा के बड़वा गांव से निकलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की, IIT दिल्ली से उच्च शिक्षा हासिल की, रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम किया, फिर हरियाणा लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल कर DSP बनीं और इसके बाद UPSC Civil Services Examination 2023 में ऑल इंडिया 248वीं रैंक हासिल करके IPS कैडर तक पहुंचीं।
इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि वह दौर है जब UPSC की तैयारी के दौरान उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। उनकी सार्वजनिक रूप से साझा की गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपनी कमियों को पहचानकर उन पर काम किया और दोबारा परीक्षा दी।
गांव से निकलकर IIT दिल्ली तक का सफर
जया शर्मा का जन्म 3 अप्रैल 1997 को हरियाणा के बड़वा गांव में हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई हिसार के विद्या देवी जिंदल स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक की पढ़ाई की और IIT दिल्ली से MSc की डिग्री हासिल की।
उनकी शिक्षा का यह सफर इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि आगे चलकर उन्होंने तकनीकी और शोध आधारित अनुभव को सिविल सेवा की तैयारी के साथ जोड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने एक निजी कंपनी में काम किया और ISRO से जुड़े एक रिसर्च प्रोजेक्ट पर भी काम किया था।
यानी सिविल सेवा उनका पहला और एकमात्र करियर विकल्प नहीं था। अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव लेने के बाद उन्होंने प्रशासन और पुलिस सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
पहले ही प्रयास में HPSC में 8वीं रैंक
UPSC की तैयारी के साथ जया शर्मा ने हरियाणा लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी दी। उन्होंने HPSC परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल की और DSP पद के लिए चयनित हुईं।
दिलचस्प बात यह रही कि UPSC का परिणाम आने के समय वह हरियाणा पुलिस में अंडर-ट्रेनी DSP थीं। यानी उस समय तक उन्होंने राज्य स्तर की पुलिस सेवा में प्रवेश कर लिया था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की सिविल सेवा परीक्षा का प्रयास जारी रखा।
यह पड़ाव उनकी कहानी में इसलिए अहम है क्योंकि उन्होंने एक उपलब्धि हासिल करने के बाद अपनी तैयारी रोक नहीं दी।
UPSC में पहली कोशिश की असफलता के बाद बदली रणनीति
UPSC की परीक्षा में सफलता उन्हें पहले प्रयास में नहीं मिली। बाद में उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों पर काम किया और दूसरे प्रयास में Civil Services Examination 2023 में 248वीं रैंक हासिल की। UPSC की उपलब्ध मेरिट सूची में जया शर्मा का नाम 248वें स्थान पर दर्ज है।
जया ने अपनी सफलता के बाद LinkedIn पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि असफलता के बाद उन्होंने उन पहलुओं पर ध्यान दिया जिन्हें वह अपने स्तर पर बदल सकती थीं। यह दृष्टिकोण प्रतियोगी परीक्षाओं में एक महत्वपूर्ण फर्क पैदा करता है—असफलता को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उसे तैयारी के फीडबैक की तरह देखना।
DSP से IPS तक पहुंचने वाली कहानी क्यों खास है?
जया शर्मा की कहानी को केवल “UPSC क्रैक करने” तक सीमित करना अधूरा होगा। उनके करियर में तीन अलग-अलग चरण दिखाई देते हैं—शैक्षणिक प्रशिक्षण, राज्य पुलिस सेवा और फिर अखिल भारतीय पुलिस सेवा।
IIT दिल्ली से मिली तकनीकी शिक्षा ने उनके अकादमिक आधार को मजबूत किया। HPSC में सफलता ने उन्हें प्रशासनिक और पुलिस सेवा का व्यावहारिक अनुभव दिया। इसके बाद UPSC की सफलता ने उनके करियर को IPS तक पहुंचाया।
यानी उन्होंने एक परीक्षा पास करने के बाद अगली मंजिल के लिए अपनी तैयारी जारी रखी।
Self-study और तैयारी को लेकर भी सामने आई जानकारी
जया शर्मा ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं अध्ययन किया। उन्होंने परीक्षा के पैटर्न के अनुसार तैयारी करने और मेहनत को महत्वपूर्ण बताया था।
यह बात प्रतियोगी परीक्षाओं के हर अभ्यर्थी के लिए कोई एक तय फार्मूला नहीं बनाती। UPSC जैसी परीक्षा में तैयारी का तरीका व्यक्ति की पृष्ठभूमि, विषय, उपलब्ध संसाधनों और अध्ययन शैली के अनुसार अलग हो सकता है। लेकिन जया का अनुभव यह दिखाता है कि अपनी कमियों की पहचान और तैयारी की रणनीति में बदलाव लगातार महत्वपूर्ण रहते हैं।
उनकी सफलता का सबसे बड़ा सबक क्या है?
जया शर्मा की उपलब्धियों की सूची लंबी है—गांव से शिक्षा की शुरुआत, दिल्ली विश्वविद्यालय, IIT दिल्ली, रिसर्च अनुभव, HPSC में 8वीं रैंक, DSP के रूप में सेवा और फिर UPSC में 248वीं रैंक।
लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे उपयोगी पहलू शायद यह है कि एक सफलता के बाद भी उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य के लिए प्रयास जारी रखा और एक असफल प्रयास के बाद रणनीति बदली।
प्रतियोगी परीक्षाओं में हर अभ्यर्थी का परिणाम अलग होता है। इसलिए किसी एक अधिकारी की यात्रा को सफलता की गारंटी मानने के बजाय उससे तैयारी की प्रक्रिया के बारे में सीखना ज्यादा उपयोगी है।
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Gen Z अधिकारी के रूप में नई पीढ़ी के लिए अलग संदेश
1997 में जन्मी जया शर्मा को कई मीडिया रिपोर्टें Gen Z IPS अधिकारी के रूप में पेश कर रही हैं। उनकी कहानी उस पीढ़ी की बदलती करियर प्राथमिकताओं को भी दिखाती है, जहां एक युवा तकनीकी शिक्षा, निजी क्षेत्र, रिसर्च और सरकारी सेवा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव लेकर आगे बढ़ सकता है।
जया ने पहले ही सार्वजनिक बातचीत में एक सक्षम और ईमानदार अधिकारी के रूप में समाज की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि वह चाहती हैं कि जिस शहर में उनकी नियुक्ति हो, वहां जनता उन्हें अपना समझे।



