जशपुर में अवैध शराब का बड़ा भंडाफोड़, ढाई लाख की खेप जब्त; तस्करी के खिलाफ आबकारी की सख्त कार्रवाई
जशपुर जिले में दूसरे राज्य से लाई गई शराब की बड़ी खेप पकड़ने का मामला सामने आया है। सरगुजा संभाग की आबकारी उड़नदस्ता टीम ने बगीचा थाना क्षेत्र के झिक्की गांव में कार्रवाई करते हुए 35 पेटियों में रखी मध्यप्रदेश की गोवा व्हिस्की जब्त की। बरामद शराब की मात्रा 315 लीटर बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ढाई लाख रुपये है।
कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस और आबकारी विभाग के लिए यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरे राज्य की शराब को छत्तीसगढ़ में खपाने की कोशिश राजस्व के साथ-साथ अवैध शराब के नेटवर्क पर भी सवाल खड़े करती है।
घर के पीछे तिरपाल के नीचे छिपाकर रखी थी शराब
आबकारी विभाग को सोमवार रात सूचना मिली थी कि झिक्की गांव में एक घर पर बड़ी मात्रा में दूसरे राज्य की शराब पहुंचाई गई है। सूचना की पुष्टि के बाद सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने मंगलवार सुबह दबिश दी।
अधिकारियों के अनुसार, घर की तलाशी के दौरान पीछे के बरामदे में तिरपाल से ढकी 35 पेटियां मिलीं। इनमें कुल 1,750 नग शराब बरामद हुई। जब्त शराब मध्यप्रदेश की बताई गई है।
मौके पर मौजूद सुदर्शन गुप्ता को टीम ने गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद उसे जेल भेजा गया।
दूसरे राज्य की शराब पहुंचना क्यों गंभीर मामला?
इस कार्रवाई का महत्व केवल जब्त की गई शराब की कीमत तक सीमित नहीं है। दूसरे राज्य से शराब की अवैध आवाजाही का सीधा संबंध शराब की कीमत, टैक्स व्यवस्था और स्थानीय बाजार में गैरकानूनी बिक्री से हो सकता है।
जब किसी राज्य की शराब दूसरे राज्य में अवैध तरीके से पहुंचती है, तो उससे सरकारी राजस्व प्रभावित होने की आशंका रहती है। साथ ही, बिना वैध लाइसेंस या नियंत्रण के शराब की बिक्री होने पर उपभोक्ता सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं।
जशपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए दूसरे राज्यों से होने वाली आवाजाही पर निगरानी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी एक खेप की बरामदगी के बाद जांच का अगला सवाल यही होना चाहिए कि शराब कहां से चली, किस नेटवर्क के जरिए पहुंची और इसे आगे किन इलाकों में खपाने की योजना थी।
35 पेटियां बरामद होना क्या संकेत देता है?
35 पेटियों में 1,750 नग शराब मिलना यह बताता है कि मामला व्यक्तिगत इस्तेमाल से कहीं अलग है। इतनी मात्रा को किसी संभावित आपूर्ति या बिक्री नेटवर्क के संदर्भ में जांचना स्वाभाविक है।
आबकारी विभाग के लिए अब आगे की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी के संपर्क में और कौन लोग थे। यदि किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े सुराग मिलते हैं, तो कार्रवाई केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर सप्लाई चेन तक पहुंच सकती है।
यही किसी भी बड़ी शराब जब्ती की वास्तविक उपयोगिता होती है—सिर्फ माल पकड़ना नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद नेटवर्क को समझना और तोड़ना।
आबकारी उड़नदस्ता की कार्रवाई बनी अहम
कार्रवाई आबकारी आयुक्त पीएस अल्मा और जिला आबकारी अधिकारी इंद्रबली मार्कंडेय के मार्गदर्शन में तथा सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में की गई। टीम में आबकारी मुख्य आरक्षक अशोक सोनी सहित अन्य अधिकारी और जवान शामिल रहे।
सूचना के आधार पर पहले सत्यापन और फिर दबिश की कार्रवाई यह दिखाती है कि अवैध शराब के मामलों में स्थानीय सूचना तंत्र की भूमिका कितनी अहम होती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी खेप की जानकारी समय रहते मिलना प्रवर्तन एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है।
आगे की जांच पर रहेगी नजर
इस मामले में सबसे अहम पहलू अब यह होगा कि जब्त शराब की सप्लाई का स्रोत और संभावित खरीदारों तक विभाग कितना पहुंच पाता है। केवल खेप बरामद होने से अवैध कारोबार की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
अगर जांच में सप्लायर, परिवहनकर्ता या संभावित खरीदारों की कड़ी सामने आती है, तो यह कार्रवाई अधिक व्यापक नेटवर्क तक पहुंचने का आधार बन सकती है।



