ISRO के सेमी-क्रायोजेनिक इंजन विकास कार्यक्रम को लेकर भारत और रूस के बीच अहम समझौते की तैयारी हो रही है। इस सहयोग का उद्देश्य भारत की लॉन्च क्षमताओं को मजबूत करना और भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों को नई गति देना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह इंजन अधिक पेलोड क्षमता और बेहतर ईंधन दक्षता प्रदान करेगा।
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन तरल ऑक्सीजन और केरोसीन जैसे ईंधन पर आधारित होता है, जो पारंपरिक इंजनों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और किफायती माना जाता है। इस तकनीक के सफल विकास से भारी उपग्रहों की लॉन्चिंग आसान होगी और गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। रूस के साथ तकनीकी सहयोग से इस परियोजना की गति तेज होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। इससे भविष्य में गहरे अंतरिक्ष मिशनों और अंतरराष्ट्रीय स्पेस सहयोग में भारत की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।


