भारत अब अपनी सामरिक रणनीति को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। ‘त्रिशूल’ मिशन की सफलता के बाद अब भारत श्रीलंका के साथ मिलकर एक बड़ा रक्षा और समुद्री सुरक्षा प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। दोनों देशों के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को देखते हुए यह कदम रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और श्रीलंका मिलकर हिंद महासागर में निगरानी क्षमता को बढ़ाने, समुद्री आतंकवाद और तस्करी पर लगाम लगाने के लिए एक संयुक्त सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इस पहल के तहत तटीय राडार नेटवर्क, सूचना साझा करने की प्रणाली और नौसैनिक अभ्यास को और मजबूत किया जाएगा।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सहयोग चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने श्रीलंका में बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है। ऐसे में भारत और श्रीलंका के बीच बढ़ता सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन को नया आयाम देगा।
श्रीलंका की ओर से भी इस प्रोजेक्ट को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। कोलंबो सरकार ने कहा है कि भारत उसका “सबसे भरोसेमंद साझेदार” है और दोनों देशों का उद्देश्य “साझा सुरक्षा और समृद्धि” है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ‘त्रिशूल’ जैसे आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रमों और क्षेत्रीय साझेदारियों के जरिए भारत न सिर्फ अपनी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा रहा है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहा है।


