देश के लिए खेलने का जज़्बा क्या होता है, यह हाल ही में उन भारतीय खिलाड़ियों ने दिखा दिया जिन्होंने अपने पिता को खोने के गहरे दुख के बावजूद टीम के साथ जुड़ने का फैसला किया। निजी शोक की इस कठिन घड़ी में भी उन्होंने तिरंगे की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। आंखों में आंसू थे, लेकिन दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून साफ नजर आया।
टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, खिलाड़ियों ने अंतिम संस्कार और पारिवारिक रस्मों के बाद सीधे कैंप जॉइन किया। साथियों और कोचिंग स्टाफ ने भी उनके साहस और समर्पण की सराहना की। मैदान पर उतरते समय पूरा स्टेडियम भावुक हो उठा और दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका हौसला बढ़ाया।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि त्याग और जिम्मेदारी की मिसाल है। निजी दुख से ऊपर उठकर देश के लिए खेलने का यह जज्बा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। भारतीय खिलाड़ियों के इस अदम्य साहस को पूरा देश सलाम कर रहा है।


