टैरिफ, बाजार पहुंच और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों पर बनी हुई है जटिलता; दोनों देशों के बीच बातचीत जारी, लेकिन नई रियायतों की गुंजाइश सीमित
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल एक कठिन दौर में पहुंच गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता अब एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां आगे किसी अतिरिक्त रियायत पर सहमति बनाना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत बंद नहीं हुई है और वार्ताकार अभी समझौते के रास्ते तलाश रहे हैं।
बाजार पहुंच और टैरिफ पर बनी चुनौती
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत फरवरी 2025 से जारी है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ बाजार पहुंच और व्यापार से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान करना है।
सीतारमण के अनुसार, वार्ता में काफी बातचीत और समझौते की कोशिश हो चुकी है, लेकिन अब दोनों पक्षों के लिए आगे और बदलाव स्वीकार करना आसान नहीं है। उन्होंने व्यापार घाटे को कम करने के लिए टैरिफ के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि व्यापारिक असंतुलन का समाधान बातचीत और आपसी समझ के जरिए किया जाना चाहिए।
रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी महत्वपूर्ण
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में हालिया कानून ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर ऊंचे टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है।
इस परिस्थिति में भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात—दोनों हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। रूस से तेल खरीद में बदलाव का असर ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है, जबकि अमेरिकी टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकते हैं।
अमेरिकी अधिकारी भी बोले- समझौता अभी दूर
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने 1 अक्टूबर को कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तत्काल होने की स्थिति में नहीं है। हालांकि, उन्होंने भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बातचीत को रचनात्मक बताया और कहा कि दोनों देशों के अधिकारी प्रमुख अड़चनों को दूर करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका के दौरे पर थे। उन्होंने मिलवॉकी में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के साथ अमेरिकी उद्योग जगत, निवेशकों और अन्य प्रतिनिधियों से भी बातचीत की।
मोदी-ट्रंप के बीच भी हुई बातचीत
व्यापार वार्ता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 30 सितंबर को फोन पर बातचीत हुई। भारत सरकार के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों सहित द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा की और भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
आगे क्या होगा?
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत जारी है, लेकिन टैरिफ, बाजार पहुंच, व्यापार संतुलन और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे वार्ता को जटिल बना रहे हैं। वित्त मंत्री की ताजा टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को शेष मतभेदों पर सहमति बनानी होगी।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यापार समझौता समाप्त हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बातचीत जारी है, लेकिन तत्काल समझौते की संभावना को लेकर अमेरिकी पक्ष भी सावधानी बरत रहा है।
पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असर दोनों देशों के निर्यातकों, आयातकों, उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। खासकर टैरिफ में बदलाव होने पर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और दोनों देशों के बीच व्यापार की लागत प्रभावित हो सकती है।



