Japan PM India Visit: भारत और जापान अपने व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी में हैं. दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर की बजाय सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में भुगतान किया जाएगा. इससे दोनों देशों के कारोबारियों को डॉलर के जरिए भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लेनदेन पहले से ज्यादा आसान, तेज और सस्ता हो सकेगा.
अभी तक भारत और जापान के बीच व्यापार करते समय पहले रुपये और येन को डॉलर में बदला जाता है फिर भुगतान किया जाता है. इस प्रक्रिया में दो बार मुद्रा बदलने का खर्च आता है और डॉलर के उतार-चढ़ाव का असर भी पड़ता है.
साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा. इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी.
बैठक के बाद हो सकता है ऐलान
नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय कंपनियां सीधे रुपये में और जापानी कंपनियां सीधे येन में भुगतान कर सकेंगी. इससे विदेशी मुद्रा विनिमय का खर्च घटेगा और कारोबारियों का समय भी बचेगा. इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है.
बैठक में होगी इस मुद्दे पर चर्चा
इस प्रस्ताव पर दोनों देशों के नेताओं की बैठक के दौरान चर्चा होने की संभावना है. योजना के तहत भारत और जापान के बैंक ऐसी व्यवस्था विकसित करेंगे, जिससे रुपये और येन में सीधे लेनदेन संभव हो सके. जापानी कंपनियों को भारत में विशेष बैंक खाते खोलने की सुविधा भी दी जा सकती है, जिससे निवेश और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिलेगा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ डॉलर पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा. वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच करीब 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. ऐसे में यदि रुपये-येन में सीधा लेनदेन शुरू होता है, तो दोनों देशों के व्यापारियों को बड़ा फायदा मिल सकता है और भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में भी तेजी आने की उम्मीद है.






