जर्मनी की शीर्ष अदालत ने ऑटोमोबाइल कंपनियों BMW और Mercedes-Benz के खिलाफ दायर क्लाइमेट केस को खारिज कर दिया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि इन कंपनियों को 2030 के बाद पेट्रोल-डीजल (इंटरनल कंबशन इंजन) वाली कारों की बिक्री से रोका जाए। अदालत ने साफ कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत कंपनियों पर इस तरह का सीधा प्रतिबंध लगाने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
यह मामला पर्यावरण संगठन DUH की ओर से दायर किया गया था, जिसमें तर्क दिया गया था कि इन कंपनियों के उत्सर्जन से जलवायु परिवर्तन तेज हो रहा है और इससे भविष्य की पीढ़ियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अदालत ने माना कि कंपनियों के लिए अलग से कोई “कार्बन बजट” तय नहीं किया गया है, इसलिए कोर्ट खुद से इस तरह की सीमा लागू नहीं कर सकता।
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इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल जर्मनी में पेट्रोल-डीजल कारों पर तुरंत बैन नहीं लगाया जाएगा और इस तरह के बड़े फैसले सरकार और संसद के स्तर पर ही लिए जाएंगे, न कि अदालतों के जरिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम संकेत देता है, हालांकि भविष्य में इस मुद्दे पर कानूनी और नीतिगत बहस जारी रह सकती है।


