दुनिया तेजी से बढ़ते तापमान और सूखे के दोहरे संकट की ओर बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के मुताबिक साल 2090 तक करीब 260 करोड़ लोग भीषण गर्मी और लंबे सूखे की मार झेल सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण नहीं किया गया, तो सदी के अंत तक हीटवेव और सूखे का संयुक्त प्रभाव मौजूदा स्तर से लगभग पांच गुना बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार एशिया और अफ्रीका के घनी आबादी वाले इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहां पानी की कमी, फसल उत्पादन में गिरावट और स्वास्थ्य संकट तेजी से बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार पड़ने वाली लू और बारिश के घटते पैटर्न से खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा होगा, जिससे गरीब और विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन को सीमित करने के लिए तुरंत वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, पानी के बेहतर प्रबंधन और जलवायु अनुकूल कृषि अपनाना ही इस संकट से बचने का रास्ता बताया गया है। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में यह संकट मानव जीवन और अर्थव्यवस्था दोनों पर भारी पड़ सकता है।


