एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया है कि शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में केवल अग्न्याशय ही नहीं, बल्कि लिवर और मांसपेशियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। करीब 25 लाख लोगों के जेनेटिक डाटा के विश्लेषण से पता चला है कि इन तीनों अंगों की कार्यप्रणाली मिलकर यह तय करती है कि किसी व्यक्ति में डायबिटीज का खतरा कितना है और ब्लड शुगर कैसे नियंत्रित होती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अग्न्याशय जहां इंसुलिन के उत्पादन के लिए जिम्मेदार है, वहीं लिवर ग्लूकोज को स्टोर और रिलीज करने का काम करता है। दूसरी ओर, मांसपेशियां इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को प्रभावित करती हैं। जेनेटिक स्तर पर इन अंगों से जुड़े बदलाव शुगर मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकते हैं, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
read also: PM Modi in Malaysia: आतंकवाद पर भारत का दो टूक संदेश, न कोई दोहरा मापदंड, न कोई समझौता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस शोध से डायबिटीज के इलाज और रोकथाम के नए रास्ते खुल सकते हैं। भविष्य में जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर व्यक्तिगत उपचार और लाइफस्टाइल बदलाव सुझाए जा सकेंगे। यह अध्ययन शुगर नियंत्रण को लेकर पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर पूरे शरीर को एक सिस्टम के तौर पर समझने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।





