अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के पूर्व सेना प्रमुख ने पाकिस्तान की भूमिका पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय मामलों में मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, लेकिन वास्तविकता में वह केवल “कूरियर सर्विस” की तरह काम करता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं और कई देश तनाव कम करने के प्रयासों में जुटे हैं।
पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि किसी भी देश को मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए निष्पक्षता, विश्वसनीयता और कूटनीतिक प्रभाव की आवश्यकता होती है। उनके अनुसार पाकिस्तान का रिकॉर्ड और उसकी नीतियां उसे एक प्रभावी मध्यस्थ के रूप में स्थापित नहीं करतीं। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पाकिस्तान की भूमिका को उसी नजरिए से देखता है, जैसा वह व्यवहारिक रूप से निभाता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल पाकिस्तान पर टिप्पणी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति की वास्तविकताओं को भी उजागर करता है। अमेरिका-ईरान संबंधों में बढ़ती तल्खी के बीच विभिन्न देशों की भूमिकाओं पर चर्चा तेज हो गई है और ऐसे बयान दक्षिण एशिया तथा पश्चिम एशिया की कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर नई बहस को जन्म दे सकते हैं।





