बिहार में SIR से शुरू हुआ विवाद ऑनलाइन Form 6 में अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी और ECI से रिकॉर्ड मांगे
नई दिल्ली। नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर चुनाव आयोग (ECI) और सुप्रीम कोर्ट के बीच कानूनी सवाल सामने आए हैं। मामला बिहार में शुरू हुई Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है। विवाद तब बढ़ा जब ECINET पोर्टल पर Form 6 के साथ SIR से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा दिखाई देने लगी। चुनाव आयोग का कहना है कि मूल वैधानिक Form 6 में बदलाव नहीं किया गया था, जबकि इस ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर आयोग के भीतर आपत्तियां सामने आने की रिपोर्ट हुई।
24 जून 2025: बिहार में SIR का आदेश
निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR शुरू करने का आदेश दिया। बिहार में इससे पहले 2003 में व्यापक गहन पुनरीक्षण हुआ था। आयोग ने तेजी से हो रहे शहरीकरण, बड़े पैमाने पर प्रवास, मृत्यु की जानकारी समय पर दर्ज नहीं होने और मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ी चिंताओं को इसके पीछे प्रमुख कारणों में रखा।
Form 6 के साथ सामने आया अतिरिक्त Declaration
SIR की प्रक्रिया के दौरान नए मतदाता पंजीकरण से जुड़े ऑनलाइन Form 6 में एक अतिरिक्त SIR Declaration दिखाई दिया। इस घोषणा में आवेदक को पिछले SIR से जुड़े अपने और माता-पिता के विवरण से संबंधित जानकारी देनी थी।
यहीं से मुख्य विवाद शुरू हुआ। चुनाव आयोग ने लगातार यह रुख रखा कि Form 6 में स्वयं कोई वैधानिक संशोधन नहीं किया गया, बल्कि SIR के लिए अलग घोषणा का प्रावधान था। दूसरी ओर, रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस व्यवस्था को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।
सितंबर 2026: आयोग ने दी अपनी सफाई
23 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों में Form 6 से जुड़े निर्णय पर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख हुआ। इसके बाद ECI ने कहा कि आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। 26 सितंबर को आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले में मंजूरी मिली थी और SIR की अवधि के बाहर Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।
इसके बाद SIR पूरा कर चुके राज्यों में ECINET पोर्टल से अतिरिक्त SIR Declaration को हटाया गया।
27 मई 2026: बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में ECI द्वारा कराए गए SIR की वैधता बरकरार रखी थी। अदालत ने माना कि आयोग के पास SIR कराने का अधिकार है और बिहार में अपनाई गई प्रक्रिया संवैधानिक तथा वैधानिक ढांचे के अनुरूप थी।
हालांकि, 5 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पहले के आदेश को किसी संशोधित Form 6 की मंजूरी के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता। अदालत ने Form 6 में हुए बदलाव से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं।
5 अक्टूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत अब रिकॉर्ड के माध्यम से यह देखना चाहती है कि ऑनलाइन Form 6 में बदलाव किस स्तर पर किया गया और उसे किसने अधिकृत किया।
आगे क्या होगा?
अब मामले में ECI की ओर से रिकॉर्ड और स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे। खास तौर पर यह स्पष्ट होना है कि वैधानिक Form 6 और SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा के बीच प्रशासनिक और कानूनी संबंध क्या था तथा ऑनलाइन व्यवस्था में इसे किस प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित Form 6 को मंजूरी देने की बात से साफ इनकार किया है और मामले के रिकॉर्ड की जांच की दिशा में आगे बढ़ा है। इसलिए इस विवाद पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष आने से पहले किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी
Form 6 नए पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर Form 6 के माध्यम से नए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।



