दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य आरोपी नासिर बिलाल को कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे 7 दिनों की NIA कस्टडी में भेज दिया है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से जांच को नई दिशा मिलेगी और जल्द ही साजिश में शामिल अन्य चेहरों का खुलासा भी हो सकता है।
NIA की ओर से की गई कस्टडी की मांग
NIA ने कस्टडी की मांग करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी से विस्फोटक सामग्री की सप्लाई, ब्लास्ट की प्लानिंग, साजिश में शामिल अन्य सहयोगियों और फंडिंग के सोर्स के बारे में गहन पूछताछ की जानी है। कोर्ट ने तर्कों को मानते हुए 7 दिन की रिमांड मंजूर कर ली।
मामले की गहराई से हो रही जांच
यह गिरफ्तारी इस ब्लास्ट केस की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। जांच एजेंसी अब आरोपी से यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि:
ब्लास्ट की पूरी योजना कैसे तैयार की गई
विस्फोटक सामग्री कहां से और कैसे लाई गई
लॉजिस्टिक व लोकल सपोर्ट किसने दिया
नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था
NIA को उम्मीद है कि नासिर बिलाल की गिरफ्तारी से जांच के कई नए आयाम सामने आएँगे।
पूछताछ में सामने आए बड़े खुलासे
इससे पहले इस मॉड्यूल से जुड़ी लेडी आतंकी डॉ. शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल शकील ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। दोनों ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड डॉ. उमर नबी था।
डॉ. उमर नबी ने ही 10 नवंबर को लाल किला के बाहर विस्फोटक से भरी कार के साथ आत्मघाती हमला किया था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि उमर नबी अस्पताल के कर्मचारियों और इलाज के लिए आने वाले लोगों को अपने नेटवर्क में शामिल करने की योजना बना रहा था।
उसका उद्देश्य था कि लोकल सपोर्ट तैयार हो जाए, ताकि गतिविधियाँ आसानी से चल सकें और किसी को शक भी न हो।
इन खुलासों के बाद नासिर बिलाल की गिरफ्तारी जांच को और मजबूत आधार प्रदान करती है।



