छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी खबर: धान बोनस की चौथी किस्त और खरीदी की तारीख पर बढ़ा इंतजार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान बेचने वाले लाखों किसानों की नजर अब राज्य सरकार की आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी है। खरीफ विपणन सीजन की तैयारियों के बीच धान खरीदी की शुरुआत, समर्थन मूल्य में संभावित बढ़ोतरी और लंबित बोनस की चौथी किस्त जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। किसानों के लिए यह केवल धान बेचने की तारीख का सवाल नहीं है, बल्कि खेती की लागत, अगली फसल की तैयारी और घरेलू खर्चों के प्रबंधन से भी जुड़ा मामला है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कृषि और किसानों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, धान खरीदी की अंतिम तारीख, बोनस भुगतान और नई दर को लेकर सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
धान बोनस की चौथी किस्त: 1,700 करोड़ रुपये पर टिकी किसानों की नजर
धान खरीदी के भुगतान के साथ-साथ बोनस की शेष राशि का मुद्दा भी किसानों के लिए अहम बना हुआ है। भारतीय किसान संघ ने सरकार से 1,700 करोड़ रुपये की चौथी बोनस किस्त जारी करने की मांग उठाई है।
किसानों के लिए बोनस की रकम का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मशीनरी और मजदूरी पर लगातार खर्च करना पड़ता है। समय पर मिलने वाली अतिरिक्त राशि इन खर्चों को संभालने और कर्ज का दबाव कम करने में मदद कर सकती है।
हालांकि, धान बोनस की चौथी किस्त कब जारी होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख उपलब्ध जानकारी में घोषित नहीं हुई है। इसलिए किसानों को भुगतान की संभावित तारीख से जुड़े दावों के बजाय सरकार की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए।
3,100 से 3,358 रुपये प्रति क्विंटल: कीमत बढ़ाने की मांग क्यों अहम?
पिछले खरीदी सीजन में धान का भाव 3,100 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है। अब भारतीय किसान संघ ने इसे बढ़ाकर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है।
प्रस्तावित दर और पिछली दर के बीच 258 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। यदि इतनी बढ़ोतरी लागू होती है, तो इसका लाभ बेचे गए धान की मात्रा के अनुसार अलग-अलग होगा।
उदाहरण के लिए, 100 क्विंटल धान बेचने वाले किसान को पुरानी दर की तुलना में 25,800 रुपये अधिक मिल सकते हैं। यह गणना तभी लागू होगी, जब सरकार वास्तव में 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर मंजूर करे और किसान की पूरी पात्र मात्रा पर वह दर लागू हो।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसान संगठनों की मांग, सरकार द्वारा घोषित खरीदी दर और केंद्र के न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था अलग-अलग विषय हैं। अंतिम भुगतान की गणना सरकारी नियमों, धान की श्रेणी और लागू प्रोत्साहन या बोनस व्यवस्था के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
15 नवंबर से खरीदी की चर्चा, लेकिन तारीख पर फैसला बाकी
राज्य में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, विपक्ष एक नवंबर से खरीदी शुरू करने की मांग कर रहा है। फिलहाल इन तारीखों को अंतिम सरकारी निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
खरीदी शुरू होने का समय किसानों के लिए व्यावहारिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। खेतों से धान निकालने के बाद उपज को सुरक्षित रखना, परिवहन की व्यवस्था करना और खरीदी केंद्र तक पहुंचाना आसान नहीं होता। देरी होने पर भंडारण, नमी, मौसम और स्थानीय व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
इसलिए सरकार के सामने केवल तारीख तय करने की चुनौती नहीं होगी। खरीदी केंद्रों की क्षमता, बारदाने की उपलब्धता, तौल व्यवस्था, पंजीयन संबंधी प्रक्रियाएं और भुगतान की समयसीमा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होंगी।
149 लाख टन से 160 लाख टन का लक्ष्य: व्यवस्था की होगी परीक्षा
पिछले सीजन में प्रदेश के 25.49 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों से लगभग 149 लाख टन धान खरीदे जाने की जानकारी दी गई थी। इस बार करीब 160 लाख टन खरीदी का लक्ष्य बताया गया है।
यह लक्ष्य पिछले आंकड़े से लगभग 11 लाख टन अधिक है। यानी खरीदी व्यवस्था को अधिक मात्रा में उपज संभालने की तैयारी करनी पड़ सकती है।
बड़े लक्ष्य की सफलता का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने टन धान खरीदा गया। यह भी देखना होगा कि किसानों को केंद्रों पर कितनी देर इंतजार करना पड़ा, उपज की तौल कितनी सुचारु रही और भुगतान निर्धारित समय में हुआ या नहीं।
खरीदी प्रक्रिया में छोटी-सी बाधा भी हजारों किसानों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड, पारदर्शी टोकन व्यवस्था, केंद्रों की नियमित निगरानी और शिकायतों के त्वरित निपटारे की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
कैबिनेट बैठक में किसानों के अलावा किन मुद्दों पर चर्चा संभव?
27 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक में धान खरीदी और कृषि से जुड़े विषयों के अलावा तीन दिवसीय राज्योत्सव की तैयारियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी अस्पतालों में सुधार, कृषि तकनीक और सहकारी समितियों से संबंधित प्रस्ताव भी एजेंडे का हिस्सा बन सकते हैं।
इन प्रस्तावों पर संभावित चर्चा और उनकी अंतिम मंजूरी में अंतर है। किसी योजना की घोषणा के बाद उसका वास्तविक लाभ तभी दिखाई देता है, जब बजट, जिम्मेदारी, समयसीमा और क्रियान्वयन की व्यवस्था स्पष्ट हो।
कृषि क्षेत्र में तकनीक और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने वाले निर्णयों का असर लंबे समय तक पड़ सकता है। खासकर छोटे किसानों के लिए बेहतर जानकारी, सुविधाजनक खरीदी केंद्र और समय पर भुगतान आर्थिक स्थिरता में मददगार साबित हो सकते हैं।
किसानों को अभी किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
धान खरीदी सीजन से पहले किसानों को अपना पंजीयन और संबंधित रिकॉर्ड जांच लेना चाहिए। बैंक खाते की जानकारी सही रखना, खरीदी केंद्र से जुड़ी सूचनाएं देखना और उपज के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था करना भी उपयोगी होगा।
इसके साथ ही किसानों को तीन अलग-अलग घोषणाओं पर ध्यान देना चाहिए—धान खरीदी की आधिकारिक शुरुआत, लागू खरीदी दर और बोनस की चौथी किस्त का भुगतान। इनमें से किसी एक पर फैसला होने का अर्थ यह नहीं है कि बाकी दोनों पर भी स्वतः निर्णय हो गया है।
निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ के धान उत्पादकों के लिए आने वाला खरीदी सीजन आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। बोनस की शेष राशि, धान के भाव और खरीदी की शुरुआत पर स्पष्ट निर्णय लाखों किसानों की वित्तीय योजना को प्रभावित कर सकता है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि प्रस्तावित कैबिनेट बैठक के बाद सरकार इन मुद्दों पर क्या आधिकारिक निर्णय लेती है और उसका लाभ किसानों तक कितनी जल्दी पहुंचता है।



