मोहला। बेटे के लिए कमल का फूल लाने की एक छोटी-सी इच्छा पूरी करते-करते एक पिता को अपनी जान गंवानी पड़ गई। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम डुमरटोला में गुरुवार सुबह तालाब में कमल का फूल तोड़ने उतरे 45 वर्षीय भुनेश्वर श्रीवास डूब गए। तालाब में मौजूद कमल की जड़ों और गहरी गाद में पैर फंसने के कारण वे पानी से बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
बेटे की इच्छा पूरी करने निकले थे पिता
भुनेश्वर श्रीवास मूल रूप से हालमीटोला गांव के रहने वाले थे और फिलहाल मोहला में परिवार सहित रह रहे थे। गुरुवार सुबह करीब नौ बजे वे डुमरटोला के तालाब पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उनके करीब 15 वर्षीय बेटे ने पिता से कमल का फूल लाने की इच्छा जताई थी। बेटे की यह छोटी-सी फरमाइश पूरी करने के लिए भुनेश्वर बिना किसी हिचक के तालाब में उतर गए।
दो फूल तोड़े, तीसरे की कोशिश में फंसे
तालाब में उतरने के बाद भुनेश्वर ने आसानी से दो कमल के फूल तोड़ लिए। हौसला बढ़ने पर वे तीसरा फूल तोड़ने के लिए तालाब में थोड़ा और आगे बढ़ गए। यहीं उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया — पानी के भीतर मौजूद कमल की घनी जड़ों और गहरी गाद में उनके पैर बुरी तरह उलझ गए। उन्होंने खुद को छुड़ाने और बाहर निकलने की भरसक कोशिश की, लेकिन गाद की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वे संघर्ष करते-करते पानी में डूब गए।
ग्रामीणों और परिवार में मचा कोहराम
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण और परिजन तुरंत तालाब की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिस बेटे की छोटी-सी इच्छा पूरी करने के लिए पिता तालाब में उतरे थे, उसी दौरान उनकी जान चली गई — यह बात पूरे गांव को झकझोर गई। परिवार में मातम का माहौल है और ग्रामीण भी इस हादसे से स्तब्ध हैं।
पुलिस ने बरामद किया शव, जांच शुरू
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से तालाब से भुनेश्वर श्रीवास का शव बरामद किया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, ताकि मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके।
तालाबों और जलाशयों में क्यों होते हैं ऐसे हादसे
गांवों में स्थित पुराने तालाबों और जलाशयों में अक्सर तली में मोटी गाद जमा हो जाती है, और कमल जैसे जलीय पौधों की जड़ें आपस में घनी उलझी होती हैं। जो व्यक्ति तैरना जानता भी है, वह भी गाद और जड़ों में पैर फंसने पर आसानी से खुद को नहीं छुड़ा पाता, क्योंकि जितना ज्यादा संघर्ष किया जाता है, पैर उतना ही गहरा धंसता चला जाता है। यही वजह है कि गांवों में फूल तोड़ने, नहाने या मवेशी निकालने के दौरान तालाबों में डूबने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
सावधानी बरतने की जरूरत
ऐसी घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि अनजान गहराई और गाद वाले तालाबों में अकेले उतरने से बचना चाहिए। खासकर जिन तालाबों की तली या जलीय पौधों की स्थिति के बारे में ठीक से जानकारी न हो, वहां बिना सुरक्षा उपायों के उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में प्रशासन और पंचायत स्तर पर ऐसे तालाबों को चिन्हित कर चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे कदम हादसों को रोकने में मददगार हो सकते हैं।
FAQs
प्रश्न 1: डुमरटोला तालाब हादसे में किसकी मौत हुई?
मोहला निवासी 45 वर्षीय भुनेश्वर श्रीवास की तालाब में डूबने से मौत हुई।
प्रश्न 2: भुनेश्वर श्रीवास तालाब में क्यों उतरे थे?
उनके करीब 15 वर्षीय बेटे ने कमल का फूल लाने की इच्छा जताई थी, जिसे पूरा करने के लिए वे तालाब में उतरे थे।
प्रश्न 3: उनकी मौत कैसे हुई?
कमल की जड़ों और गहरी गाद में पैर फंसने से वे बाहर नहीं निकल सके और डूब गए।
प्रश्न 4: पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने मौके से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और घटना की जांच शुरू कर दी है।
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