लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपकी भी आंख खुलते ही हाथ सबसे पहले फोन की तरफ ही जाता है या आप भी अपने तकिए पास फोन रखकर सोते हैं, ताकि सुबह उठने के बाद कुछ समय स्क्रॉल कर सकें? अगर हां, तो आप अकेले नहीं है। आजकल ज्यादातर लोग सुबह उठने के बाद सबसे पहले अपना फोन ही चेक करते हैं।
अक्सर लोग इसे मोबाइल की लत समझ लेते हैं कि दिनभर फोन चलाने की आदत के कारण ही वो सुबह उठने के बाद भी पहले फोन देखते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सिर्फ लत नहीं है। दरअसल, ये हमारे दिमाग से जुड़ा व्यवहार भी हो सकता है। आइए जानें इस बारे में।
दिमाग को चाहिए नई जानकारी
सुबह उठने के बाद सबसे पहले फोन चेक करने का सीधा कनेक्शन दिमाग के व्यवहार से है। जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा दिमाग बाहरी दुनिया से फिर से जुड़ना चाहता है और नई जानकारी की तलाश करता है। इसलिए बाहर क्या चल रहा है, ये जानने के लिए या फोमो कम करने के लिए दिमाग सबसे पहला चेक करने के लिए कहता है।
धीरे-धीरे किसी नोटिफिकेशन का इंतजार या नई जानकारी पाने की उत्सुकता एक आदत बन जाती है, जो समय के साथ इतनी पक्की हो जाती है कि व्यक्ति बिना कुछ सोचे समझे उठते ही सबसे पहले अपना फोन चेक करने लगता है। ये एक ऑटोमैटिक रिसपॉन्स बन जाता है।
कैसे फंस जाते हैं इस जाल में?
सुबह उठते ही फोन चेक करने की आदत क्यू-रूटीन-रिवॉर्ड साइकिल पर काम करती है। इस साइकिल में आपको सबसे क्यू यानी संकेत मिलता है। जैसे ही आंख खुलती है, दिमाग आपको संकेत भेजता है। इसके बाद आप तुरंत फोन अनलॉक करते हैं और स्क्रॉल करना शुरू कर देता है।
जैसे ही फोन पर कोई नोटिफिकेशन या मैसेज मिलता है, तो हमारे दिमाग को राहत मिलती है कि कुछ जरूरी काम छूटा नहीं है या कोई नई जानकारी मिलने से बाहर की दुनिया से कनेक्शन बना है। ये दिमाग के लिए एक तरह का रिवॉर्ड होता है और दिमाग इस साइकिल को रोज दोहराने लगता है।
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क्या यह स्मार्टफोन की लत है?
जरूरी नहीं कि सुबह उठते ही फोन चेक करना कोई एडिक्शन हो। सुबह उठकर कुछ मिनट फोन देखना आपके दिमाग की उत्सुकता का नतीजा हो सकता है, लेकिन अगर ये घंटों तक बिना वजह स्क्रॉल में बदल जाता है, तो इससे आपको फोकस और प्रोडक्टिविटी पर काफी असर पड़ सकता है।






