Dhanteras 2026: शुभ पर्व पर इन 7 चीजों की खरीदारी से बचें, जानें बड़ी वजह और पूजा का मुहूर्त
दीपावली की तैयारियों के बीच धनतेरस का दिन खरीदारी, पूजा-पाठ और नई शुरुआत के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर लोग सोना-चांदी, नए बर्तन, आभूषण और घर की जरूरत का सामान खरीदकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन धन की देवी मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि की आराधना के लिए समर्पित है।
हालांकि, त्योहार पर क्या खरीदना चाहिए, इसके साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि किन वस्तुओं को खरीदने से परंपरागत रूप से परहेज किया जाता है। कई परिवारों में कुछ चीजों को इस दिन घर लाना अशुभ माना जाता है। इन मान्यताओं के पीछे धार्मिक प्रतीक, ज्योतिषीय धारणाएं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
खास बात यह है कि इन मान्यताओं के नियम हर क्षेत्र और परिवार में एक जैसे नहीं होते। इसलिए इन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वास के रूप में समझना चाहिए, न कि आर्थिक नुकसान या दुर्भाग्य की निश्चित वजह के तौर पर।
धनतेरस पर इन 7 वस्तुओं की खरीदारी से क्यों किया जाता है परहेज?
1. धारदार और नुकीली वस्तुएं
चाकू, कैंची, ब्लेड, सुई और अन्य धारदार उपकरणों को इस दिन खरीदने से कई परिवार परहेज करते हैं। पारंपरिक मान्यता में ऐसी वस्तुओं को कटाव, तनाव और रिश्तों में कड़वाहट का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से शुभ अवसर पर इनकी खरीदारी टालने की सलाह दी जाती है।
2. लोहे से बनी वस्तुएं
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में लोहे का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर कुछ परंपराओं में धनतेरस के दिन लोहे का सामान खरीदना उचित नहीं माना जाता। इसके स्थान पर लोग पीतल, तांबा, चांदी और सोने की वस्तुओं को प्राथमिकता देते हैं।
3. काले रंग के कपड़े और सामान
हिंदू परंपराओं में कई शुभ अवसरों पर काले रंग से परहेज किया जाता है। इसे कुछ धार्मिक मान्यताओं में नकारात्मकता और अशुभता का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन काले कपड़े, जूते या सजावटी वस्तुएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रंग को लेकर मान्यताएं समुदाय और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं।
4. कांच के बर्तन और सजावटी सामान
कांच से बनी वस्तुएं नाजुक होती हैं और आसानी से टूट सकती हैं। धार्मिक लोक मान्यताओं में कांच को राहु से जोड़कर भी देखा जाता है। इसी वजह से कुछ लोग धनतेरस पर कांच के बर्तन, क्रॉकरी और शोपीस खरीदने से बचते हैं। हालांकि, इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि कांच की वस्तु खरीदने से घर में दुर्भाग्य आता है।
5. तेल और घी की खरीदारी
दीपावली पर दीप जलाने के लिए तेल और घी की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद कुछ पारिवारिक परंपराओं में धनतेरस के दिन इनकी खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शुभ खरीदारी के इस दिन इन वस्तुओं को पहले से घर में लाकर रखना बेहतर होता है। इसलिए त्योहार की तैयारी के दौरान तेल और घी की व्यवस्था पहले ही कर लेना सुविधाजनक हो सकता है।
6. चमड़े से बनी वस्तुएं
पर्स, बेल्ट, जूते और बैग जैसी चमड़े की वस्तुओं को कुछ धार्मिक परंपराओं में पूजा और पवित्र अवसरों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। इसी कारण धनतेरस पर लेदर से बने उत्पाद खरीदने से परहेज किया जाता है। यह मान्यता मुख्य रूप से धार्मिक शुद्धता और पारंपरिक विचारों से जुड़ी है।
7. खाली बर्तन घर लाने की परंपरा
धनतेरस पर बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन एक दिलचस्प परंपरा यह भी है कि नए बर्तन को घर में खाली नहीं लाना चाहिए। मान्यता के अनुसार, उसमें थोड़े चावल, गेहूं, धनिया के बीज, मिठाई या जल डालकर घर लाना समृद्धि और बरकत का प्रतीक है। इसका संदेश यह है कि घर में आने वाली नई वस्तु के साथ अन्न और समृद्धि का भाव भी जुड़ा रहे।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
इस अवसर पर सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। इसके अलावा कुछ परिवार झाड़ू, धनिया के बीज और पूजा से जुड़ी सामग्री भी खरीदते हैं।
धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इस पर्व का संबंध केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना से भी है। खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।
धनतेरस 2026: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार:
- धनतेरस की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026, सुबह 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त (नई दिल्ली): शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक
ध्यान दें कि पूजा और खरीदारी के मुहूर्त में अंतर हो सकता है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग गणना के अनुसार समय बदल सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
धनतेरस का असली संदेश: परंपरा के साथ समझदारी भी जरूरी
त्योहारों की खूबसूरती केवल खरीदारी में नहीं, बल्कि उनसे जुड़े विश्वास, परिवार की खुशियों और सकारात्मक शुरुआत में होती है। धनतेरस पर कौन-सी वस्तु खरीदनी है और किससे परहेज करना है, यह व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर करता है।
हालांकि, किसी वस्तु की खरीदारी को सीधे आर्थिक तंगी या दुर्भाग्य से जोड़ना उचित नहीं है। बेहतर होगा कि लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार खरीदारी करें, जरूरत से ज्यादा खर्च करने से बचें और त्योहार को स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा परिवार की खुशियों के साथ मनाएं।
आखिरकार, समृद्धि का अर्थ केवल घर में नई वस्तुएं लाना नहीं, बल्कि आर्थिक संतुलन, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार में खुशहाली बनाए रखना भी है।




