भारत सरकार ने डी-ऑयल्ड राइस ब्रान (De-oiled Rice Bran) के निर्यात को मंजूरी दे दी है। अब देश से इसका निर्यात किया जा सकेगा। वाणिज्य मंत्रालय ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। नया नियम 1 दिसंबर 2025 से लागू होगा।
डी-ऑयल्ड राइस ब्रान दरअसल चावल की भूसी से तेल निकालने के बाद बचा हुआ पोषक तत्वों से भरपूर पदार्थ होता है, जिसका उपयोग पशु आहार, फीड इंडस्ट्री और खाद्य सप्लीमेंट बनाने में किया जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में डी-ऑयल्ड राइस ब्रान का बाजार करीब 3,000 करोड़ रुपये का है। अब निर्यात की मंजूरी मिलने से इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं खुलेंगी। भारत एशिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो बड़े पैमाने पर राइस ब्रान ऑयल और उसके उत्पाद बनाते हैं।
सरकार का यह फैसला न केवल किसानों और चावल मिल मालिकों के लिए राहत भरा है, बल्कि फॉरेक्स इनकम बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने में भी मदद करेगा।
👉 मुख्य बातें:
डी-ऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर लगी रोक हटाई गई
आदेश 1 दिसंबर 2025 से लागू
अनुमानित बाजार मूल्य 3,000 करोड़ रुपये
पशु आहार और फीड इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण उत्पाद


