चीन को लेकर अमेरिका की रणनीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के मुद्दों पर चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर संवाद के संकेत भी दिए जा रहे हैं। इसी विरोधाभास को लेकर राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह कोई भ्रम नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
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ट्रंप के कार्यकाल में भी देखा गया था कि वह चीन पर टैरिफ, टेक्नोलॉजी बैन और सख्त बयानबाजी के जरिए दबाव बनाते थे, लेकिन साथ ही डील की गुंजाइश भी खुली रखते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की रणनीति से अमेरिका वैश्विक मंच पर दबदबा बनाए रखते हुए चीन को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करता है। चीन-अमेरिका संबंधों में यह दोहरी नीति आगे भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करती नजर आ सकती है।


