छत्तीसगढ़ के MBBS इंटर्न्स को बड़ी राहत, अब हर महीने ₹25 हजार स्टाइपेंड; 1 अक्टूबर से लागू होगी नई दर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई पूरी कर इंटर्नशिप कर रहे छात्रों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने MBBS इंटर्न्स की मासिक शिष्यवृत्ति बढ़ाकर ₹25,000 करने की मंजूरी दे दी है। संशोधित दर 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।
इस फैसले से प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे सैकड़ों मेडिकल छात्रों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि नई दर लागू करने के प्रस्ताव को वित्त विभाग से भी सहमति मिल चुकी है।
1 अक्टूबर से खाते में बढ़ी हुई राशि
चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न्स को अब मौजूदा स्टाइपेंड की जगह ₹25,000 प्रतिमाह की दर से शिष्यवृत्ति दी जाएगी। यह संशोधन 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
यानी अक्टूबर से जिन MBBS छात्रों की इंटर्नशिप सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चल रही होगी, उन्हें संशोधित दर के आधार पर स्टाइपेंड मिलेगा। वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है, जिसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने औपचारिक आदेश जारी किया है।
सिर्फ राशि बढ़ाने का फैसला नहीं, मेडिकल ट्रेनिंग के दौरान आर्थिक सहारा भी
MBBS इंटर्नशिप डॉक्टर बनने की पढ़ाई का वह चरण है, जिसमें छात्र अस्पताल की वास्तविक व्यवस्था के बीच मरीजों की देखभाल, क्लिनिकल प्रक्रियाओं और मेडिकल टीम के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव हासिल करते हैं।
इस दौरान इंटर्न्स को अस्पताल में नियमित ड्यूटी और जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी छात्रों के लिए सिर्फ अतिरिक्त आय नहीं है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली मेडिकल ट्रेनिंग के दौरान आर्थिक सहायता भी है।
विशेषज्ञों के नजरिए से देखें तो मेडिकल शिक्षा में इंटर्नशिप का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसी अवधि में छात्र किताबों में सीखी जानकारी को वास्तविक मरीजों और अस्पताल की परिस्थितियों से जोड़ते हैं। बेहतर आर्थिक सहायता मिलने से छात्रों पर रोजमर्रा के खर्च का दबाव कुछ कम हो सकता है और वे प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।
राज्य सरकार के फैसले से मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को भी मिल सकता है फायदा
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने वाले छात्रों के लिए स्टाइपेंड में सुधार का असर व्यापक स्तर पर देखा जा सकता है। चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के लिए केवल मेडिकल सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता। छात्रों की पढ़ाई के बाद की क्लिनिकल ट्रेनिंग और कार्य परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क बढ़ने के साथ आने वाले वर्षों में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत भी बनी रहेगी। ऐसे में इंटर्नशिप के दौरान बेहतर आर्थिक सहायता मेडिकल छात्रों के लिए एक सकारात्मक प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखी जा सकती है।
हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इंटर्नशिप की गुणवत्ता, ड्यूटी व्यवस्था, प्रशिक्षण सुविधाएं और अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों में समान रूप से सुधार कितना होता है।
राज्यपाल के नाम से जारी हुआ आदेश
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है। महानदी भवन से जारी पत्र पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव पूरन लाल साहू के डिजिटल हस्ताक्षर हैं।
यह निर्णय संचालक, चिकित्सा शिक्षा (DME) की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है। प्रस्ताव को वित्त विभाग की सहमति मिलने के बाद संशोधित स्टाइपेंड को लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई।
MBBS छात्रों के लिए आगे क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था का सबसे सीधा असर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के उन MBBS इंटर्न्स पर पड़ेगा जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू संशोधित दर के दायरे में आएंगे। उन्हें अब ₹25,000 प्रतिमाह की दर से शिष्यवृत्ति मिलेगी।



