बिलासपुर: जीवन, व्यवसाय, रोजगार, अध्ययन और रोजमर्रा की हर चीज में बहुत तेजी से जगह बनाते जा रहे एआई का विश्वविद्यालयों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने में भी प्रवेश हो गया है। बिलासपुर जिले में इसकी पहल पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय प्रबंधन ने की है। विश्वविद्यालय में गत 19 जुलाई को प्री बीएड और प्री डीएलएड की परीक्षाएं हुई थीं।
500 सीटों के लिए 54498 परीक्षार्थियों ने यह परीक्षा दी थी। कुल 80 हजार से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में बहुत ज्यादा समय लगने और परीक्षा परिणाम में देरी के आसार देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एआई का सहारा ले लिया है। एआई से ही सिर्फ प्रीबीएड और प्री डीएलएड की उत्तर पुस्तिकाएं ही नहीं, यूजी एंड पीजी की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच भी करवाई जा रही है।
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सॉफ्ट कॉपी में ही जांच और अंक देने की सुविधा
शिक्षक कंप्यूटर या लैपटॉप के माध्यम से उत्तरपुस्तिका की सॉफ्ट कॉपी देखते हैं और उसी में अंक देने का विकल्प रहता है। इससे हार्ड कॉपी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। प्रबंधन का कहना है कि इससे समय और ट्रांसपोर्टिंग का खर्च दोनों बच रहे हैं।
त्तर समझने में एआई से मिलती है मदद
सॉफ्टवेयर में संबंधित विषय की संदर्भ पुस्तकों की पीडीएफ भी अपलोड की गई हैं। यदि किसी प्रश्न के उत्तर को समझने में शिक्षक को परेशानी होती है तो एआई की सहायता से उत्तर तैयार किया जा सकता है। इसके बाद शिक्षक स्वयं उसका परीक्षण कर अंक निर्धारित कर सकते हैं। इससे जांच में एकरूपता और पारदर्शिता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
एआई का सॉफ्टवेयर बनाया
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उत्तर पुस्तिकाओं की ऑनलाइन जांच की व्यवस्था के लिए एक एआई आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाओं को अलग से बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम में स्कैन कर सॉफ्ट कॉपी तैयार की जाती है। इसके बाद सॉफ्टवेयर में उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड कर निश्चित संख्या में कॉपियां जांच करने वाले शिक्षकों की आईडी में ट्रांसफर की जाती हैं।
एक उत्तरपुस्तिका की जांच के लिए करीब 3 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। सारी कॉपियां इस समय सीमा में जंच रही हैं। कुछ जगह दिक्कत की स्थिति में तय समय में जांच पूरी नहीं होती है, तो इसी सॉफ्टेवेयर पर उत्तर पुस्तिका दूसरे शिक्षक की आईडी में ट्रांसफर हो जाती है।
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ऑनलाइन मूल्यांकन व्यवस्था से उत्तरपुस्तिकाओं की जांच में लगने वाला समय कम होगा और परिणाम समय पर जारी किए जा सकेंगे। एआई को मूल्यांकन का विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षक के लिए सहायक तकनीक के रूप में उपयोग किया जा रहा है। अंतिम अंक शिक्षक के मूल्यांकन के आधार पर ही निर्धारित किए जाते हैं।



