रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमानक पनीर और डेयरी एनालॉग (Dairy Analog) उत्पादों पर सख्त कार्रवाई की है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्यभर में ऐसे गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है, जो असली दूध से बने उत्पादों जैसा भ्रम पैदा करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की घोषणा के बाद विभाग ने यह आदेश जारी किया है। सरकार का कहना है कि कई उत्पादों में दूध की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल और अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल कर उन्हें पनीर, क्रीम और मक्खन जैसे दुग्ध उत्पादों के रूप में बेचा जा रहा था, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो रहे थे।
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किन उत्पादों पर रहेगा प्रतिबंध?
सरकार के आदेश के अनुसार प्रतिबंध उन उत्पादों पर लागू होगा—
- जो वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं।
- जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का उपयोग किया गया हो।
- जिनकी पैकेजिंग, लेबलिंग या प्रदर्शन उपभोक्ताओं को भ्रमित करता हो और उन्हें असली डेयरी उत्पाद जैसा दिखाया जाता हो।
इन उत्पादों को मिली छूट
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ मानकीकृत खाद्य उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। इनमें शामिल हैं—
- फ्रोजन डेजर्ट
- प्रोसेस्ड चीज़
- मिक्स्ड फैट स्प्रेड
इन उत्पादों के लिए पहले से निर्धारित खाद्य मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।
किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?
यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 और धारा 18 के तहत की गई है। विभाग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को मिलावटी और भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
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कितने समय तक प्रभावी रहेगा आदेश?
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार यह प्रतिबंध राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष तक अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अंतिम नियम जारी होने तक लागू रहेगा। जो भी अवधि पहले समाप्त होगी, उसी के अनुसार आदेश प्रभावी रहेगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी खाद्य कारोबार संचालकों, निर्माताओं, वितरकों और संबंधित अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।



