छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षकों को प्रमोशन का रास्ता साफ, 5 साल सेवा के बाद बन सकेंगे व्यायाम शिक्षक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे सहायक शिक्षकों के लिए पदोन्नति से जुड़ा नया अवसर सामने आया है। निर्धारित शैक्षणिक और खेल संबंधी योग्यता पूरी करने वाले सहायक शिक्षक अब पांच वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद पदोन्नति के माध्यम से व्यायाम शिक्षक के पद पर जाने के लिए पात्र हो सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने व्यायाम शिक्षक, पीटीआई और सहायक कोच से जुड़े भर्ती नियमों में संशोधन किया है।
इस बदलाव का असर केवल शिक्षकों की पदोन्नति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए सरकार ने सरकारी स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा के लिए अलग मानव संसाधन तैयार करने की व्यवस्था को भी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
2,435 पदों का नया कैडर, आधे पद प्रमोशन से
संशोधित व्यवस्था में व्यायाम शिक्षक, पीटीआई और सहायक कोच के कुल 2,435 पदों का कैडर निर्धारित किया गया है। इनमें मैदानी क्षेत्र के ई-संवर्ग में 1,513 और जनजातीय क्षेत्र के टी-संवर्ग में 922 पद रखे गए हैं।
इन पदों को भरने में सीधी भर्ती और विभागीय पदोन्नति दोनों को जगह दी गई है। कुल पदों में 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने का प्रावधान है।
इससे दो स्तर पर अवसर बनते हैं। खेल और शारीरिक शिक्षा में आवश्यक योग्यता रखने वाले नए अभ्यर्थी सीधी भर्ती के जरिए सरकारी सेवा में प्रवेश कर सकते हैं, जबकि विभाग में पहले से कार्यरत पात्र कर्मचारियों को करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
पांच साल की सेवा क्यों महत्वपूर्ण है?
सहायक शिक्षकों के लिए इस बदलाव का सबसे अहम पहलू पांच वर्ष की सेवा से जुड़ा प्रावधान है। निर्धारित योग्यता रखने वाले और आवश्यक सेवा अवधि पूरी करने वाले शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
इस व्यवस्था से विभाग में काम कर रहे ऐसे कर्मचारियों के लिए करियर का एक अतिरिक्त रास्ता बनता है, जिनके पास खेल या शारीरिक शिक्षा से संबंधित योग्यता है। हालांकि किसी शिक्षक को केवल पांच साल की सेवा पूरी होने से स्वतः पदोन्नति मिलना जरूरी नहीं है। पात्रता, चयन प्रक्रिया और विभागीय नियमों का पालन भी आवश्यक रहेगा।
लेवल-8 वेतनमान वाले पद पर जाने का अवसर
संशोधित भर्ती नियमों में व्यायाम शिक्षक के पद को तृतीय श्रेणी के लेवल-8 वेतनमान में शामिल किया गया है। इसलिए पात्र सहायक शिक्षकों के लिए यह बदलाव केवल पदनाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च वेतन स्तर वाले पद पर करियर प्रगति का अवसर भी उपलब्ध कराता है।
यही कारण है कि यह संशोधन विभागीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से सेवा दे रहे योग्य शिक्षकों को अपनी विशेषज्ञता के आधार पर आगे बढ़ने का विकल्प मिल सकता है।
संभाग स्तर पर होगी चयन प्रक्रिया
व्यायाम शिक्षक और संबंधित पदों पर भर्ती एवं पदोन्नति की प्रक्रिया संभाग स्तर पर संचालित की जाएगी। संबंधित संभाग के संयुक्त संचालक (शिक्षा) नियुक्ति प्राधिकारी होंगे।
चयन के लिए चार सदस्यीय समिति का प्रावधान किया गया है। इसमें संयुक्त संचालक अध्यक्ष, जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य, उप संचालक सदस्य-सचिव और सहायक संचालक (क्रीड़ा) विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
इस व्यवस्था में खेल क्षेत्र के विशेषज्ञ अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि पद से संबंधित योग्यता और कार्यक्षमता का आकलन सामान्य शिक्षकीय पदों से अलग प्रकृति का हो सकता है।
छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए आयु सीमा में राहत
सीधी भर्ती के लिए सामान्यतः अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष रखी गई है।
इससे प्रदेश के ऐसे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर मिल सकता है, जिन्होंने बीपीएड, डीपीएड या संबंधित खेल एवं शारीरिक शिक्षा की योग्यता हासिल की है और सरकारी स्कूलों में सेवा करना चाहते हैं।
स्कूलों में खेल शिक्षा को मिलेगा नया आधार
स्कूल शिक्षा में खेल को केवल अतिरिक्त गतिविधि के रूप में देखने के बजाय नियमित शारीरिक शिक्षा और प्रशिक्षित मानव संसाधन से जोड़ना जरूरी है। नए कैडर की व्यवस्था इसी दिशा में एक संस्थागत बदलाव का संकेत देती है।
यदि पर्याप्त संख्या में योग्य व्यायाम शिक्षक उपलब्ध होते हैं, तो स्कूलों में खेल प्रशिक्षण, फिटनेस गतिविधियों, प्रतियोगिताओं और विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है।
खास तौर पर जनजातीय क्षेत्रों के लिए अलग टी-संवर्ग में पद निर्धारित किए जाने से वहां स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ती है।
आगे क्या बदलेगा?
इस संशोधन का वास्तविक प्रभाव भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिखाई देगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि स्वीकृत पदों को कितनी तेजी से भरा जाता है और स्कूलों में इन शिक्षकों की वास्तविक तैनाती किस तरह की जाती है।



