अमृतसर ASI फायरिंग केस में बड़ा एक्शन, 5 आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज की
अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में ASI जसवंत सिंह पर हुई फायरिंग की जांच अब सिर्फ हमलावरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है। अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच के दौरान कथित तौर पर सीमा पार बैठे एक हैंडलर से संपर्क के संकेत मिलने का दावा किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमले के पीछे केवल स्थानीय अपराधियों का समूह था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।
मामले में पुलिस कार्रवाई उस समय और महत्वपूर्ण हो गई, जब ASI पर हमले के एक प्रमुख आरोपी करणबीर सिंह उर्फ नंदी की 26 सितंबर को पुलिस के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान एक पुलिसकर्मी को भी गोली लगी, जबकि एक अन्य अधिकारी बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से बच गया।
ASI पर हमला कैसे हुआ था?
11 सितंबर की रात ASI जसवंत सिंह ड्यूटी खत्म करने के बाद घर की ओर जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, अमृतसर के राजासांसी क्षेत्र में भल्ला गांव के पास बाइक सवार हमलावरों ने उन पर फायरिंग की। गोली उनके सिर के पास लगी, लेकिन वे गंभीर नुकसान से बच गए और घटना के बाद पुलिस तक पहुंचे।
हमले के बाद पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य जांच इनपुट के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की कार्रवाई शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को कथित शूटरों और उन्हें मदद पहुंचाने वाले लोगों के बारे में जानकारी मिली।
पांच गिरफ्तारियों से जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में दो कथित शूटर भी शामिल हैं। इनकी पहचान करनवीर सिंह नंदी और गुरप्रीत उर्फ गोपी के रूप में बताई गई है। पुलिस ने ऐसे लोगों को भी पकड़ा है जिन पर आरोपियों को ठिकाना उपलब्ध कराने या उन्हें शरण देने का आरोप है।
इस तरह जांच का फोकस केवल गोली चलाने वालों तक नहीं है। किसी संगठित आपराधिक या सीमा पार नेटवर्क की पुष्टि के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि हथियार किसने उपलब्ध कराए, आरोपियों तक पैसा या निर्देश कैसे पहुंचे और हमले के बाद उन्हें किस स्तर पर सहायता मिली।
मुठभेड़ में एक आरोपी की मौत
पुलिस के अनुसार, शनिवार को आरोपियों की तलाश के दौरान झंडेर थाना क्षेत्र में संयुक्त पुलिस टीम को एक संदिग्ध के बारे में सूचना मिली। पुलिस का दावा है कि आरोपी मोटरसाइकिल से पहुंचा और रुकने के संकेत के बाद पुलिस टीम पर गोली चला दी।
इसके बाद हुई जवाबी फायरिंग में करणबीर सिंह उर्फ नंदी घायल हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं।
मुठभेड़ की परिस्थितियों और उसमें पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता का अंतिम आकलन जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।
पाकिस्तान स्थित हैंडलर का कनेक्शन कितना बड़ा है?
पुलिस अधिकारियों ने शुरुआती जांच के आधार पर एक आरोपी के पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क के संकेत मिलने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि विदेशी ठिकानों से सक्रिय कथित हैंडलर स्थानीय युवाओं को पैसे का लालच देकर अपराधों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि इस कनेक्शन को लेकर जांच अभी जारी है। किसी विदेशी हैंडलर की भूमिका को अदालत में स्थापित करने के लिए डिजिटल संपर्क, वित्तीय लेनदेन, हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के बीच संचार जैसे ठोस साक्ष्यों की जरूरत होगी।
हालिया मामलों को देखते हुए पंजाब पुलिस ने सीमा पार से संभावित निर्देश और स्थानीय स्तर पर उन्हें अंजाम देने वाले लोगों के बीच कड़ी की जांच पर भी जोर दिया है।
असली चुनौती शूटर नहीं, पूरा नेटवर्क खोजने की
ऐसे मामलों में किसी एक आरोपी की गिरफ्तारी से जांच पूरी नहीं होती। अगर पुलिस का नेटवर्क संबंधी दावा सही साबित होता है, तो जांचकर्ताओं के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि आदेश देने वाला कौन था और स्थानीय स्तर पर उसकी मदद कौन कर रहा था?
हथियारों की आपूर्ति, पैसे का इंतजाम, ठिकाना उपलब्ध कराना और हमले के बाद आरोपियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना—इन सभी कड़ियों की जांच नेटवर्क की वास्तविक संरचना समझने के लिए जरूरी होगी।
यही वजह है कि पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश भी शुरू कर दी है।
जांच के लिए डिजिटल और वित्तीय सुराग अहम
मामले की अगली दिशा इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान और अन्य संचार माध्यमों से क्या जानकारी मिलती है।
यदि सीमा पार किसी व्यक्ति से संपर्क के प्रमाण सामने आते हैं, तो जांच एजेंसियों को यह भी स्थापित करना होगा कि संपर्क किस उद्देश्य से था और क्या उसका सीधा संबंध ASI पर हमले से था। केवल संपर्क सामने आ जाना अपने आप में हमले में भूमिका का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अमृतसर में पुलिसकर्मियों पर हमलों से बढ़ी चिंता
ASI जसवंत सिंह पर हमला ऐसे समय हुआ है जब अमृतसर और गुरदासपुर क्षेत्र में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने के कई मामले सामने आए हैं। 18 सितंबर को ASI हरजीत सिंह की हत्या के मामले में भी पुलिस ने आरोपियों और कथित सीमा पार कनेक्शन की जांच की है।
इन घटनाओं ने पुलिस के सामने दोहरी चुनौती खड़ी की है—एक तरफ स्थानीय अपराधियों और हथियारों की उपलब्धता पर नियंत्रण, दूसरी तरफ संभावित सीमा पार संपर्कों और फंडिंग की कड़ियों की पहचान।
आगे की जांच पर टिकी मामले की असली तस्वीर
पांच गिरफ्तारियों और मुठभेड़ के बाद पुलिस के पास अब मामले को आगे बढ़ाने के लिए कई सुराग हैं। लेकिन इस पूरे प्रकरण की अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने, बरामद हथियारों और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच तथा आरोपियों के खिलाफ अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों से स्पष्ट होगी।



