बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विशंभर प्रसाद राठौर बनाम मनीषा राठौर मामले में 18 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार यह मामला हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(iii) के तहत मानसिक विकार के आधार पर विवाह विच्छेद की मांग से संबंधित था।
मामले में पति की ओर से यह दावा किया गया था कि पत्नी को विवाह से पहले से मानसिक बीमारी थी और यह तथ्य विवाह के समय छिपाया गया। रिकॉर्ड में बीमारी को Mania के रूप में बताया गया है। अदालत के समक्ष पेश चिकित्सकीय साक्ष्य में डॉक्टर ने स्थिति को उपचार योग्य बताया और कहा कि संबंधित महिला वैवाहिक जीवन जीने में सक्षम थी। अदालत ने यह भी पाया कि चिकित्सकीय दस्तावेजों को उचित तरीके से साक्ष्य के रूप में प्रदर्शित नहीं किया गया था।
मानसिक बीमारी के आधार पर तलाक की मांग
हाई कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि कथित मानसिक विकार की प्रकृति और गंभीरता क्या इतनी थी कि उसके आधार पर विवाह समाप्त किया जा सके। न्यायालय ने धारा 13(1)(iii) के तहत मानसिक विकार से जुड़े वैधानिक मानक पर विचार किया।
न्यायालय के अनुसार केवल मानसिक बीमारी या किसी चिकित्सकीय स्थिति का होना अपने आप में तलाक का आधार नहीं बनता। इसके लिए यह देखना आवश्यक है कि बीमारी किस स्तर की है और क्या उसकी प्रकृति ऐसी है कि याचिकाकर्ता से वैवाहिक जीवन जारी रखने की उचित अपेक्षा नहीं की जा सकती।
चिकित्सकीय साक्ष्य पर भी किया विचार
मामले में डॉक्टर की गवाही अदालत के सामने महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध न्यायिक सार के मुताबिक डॉक्टर ने संबंधित स्थिति को इलाज योग्य बताया था। साथ ही महिला के सामान्य वैवाहिक जीवन जीने में सक्षम होने की बात भी रिकॉर्ड में आई।
अदालत ने चिकित्सकीय दस्तावेजों की प्रमाणिकता और उन्हें साक्ष्य के रूप में विधिवत पेश किए जाने के पहलू पर भी विचार किया। इस आधार पर मानसिक विकार को तलाक के लिए पर्याप्त साबित करने संबंधी पति के दावे की जांच की गई।
मामले का न्यायिक रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में यह मामला First Appeal (M) No. 79/2019 के रूप में दर्ज है। सितंबर 2025 की हाई कोर्ट की cause list में भी Vishambhar Prasad Rathore Vs. Smt. Manisha Rathore नाम से यह मामला दर्ज था।
हाई कोर्ट की उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले पर फैसला 18 सितंबर 2026 को दर्ज हुआ। इसलिए इस प्रकरण को रिपोर्ट करते समय यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड इसे मुख्य रूप से मानसिक विकार के आधार पर विवाह विच्छेद की याचिका के रूप में दर्ज करता है।
वर्तमान स्थिति: हाई कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को मामले पर निर्णय दिया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इस फैसले को केवल इस रूप में प्रस्तुत करना उचित है कि अदालत ने मानसिक विकार के आधार पर तलाक की मांग से जुड़े वैधानिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों की समीक्षा की।



